Viksit Bharat 2047: बैंकिंग में मेगा सुधार, बनेगी हाई-लेवल कमेटी
विकसित भारत 2047 के विजन को हकीकत में बदलने के लिए केंद्र सरकार ने बैंकिंग सेक्टर में सबसे बड़े सुधार का फैसला लिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया है कि आने वाले दिनों में ‘बैंकिंग फॉर विकसित भारत’ पर एक हाई-लेवल कमेटी का गठन किया जाएगा। यह कमेटी 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए बैंकिंग का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार करेगी।
बजट 2026 में हुआ था पहला ऐलान / First Announced in Budget 2026
यह कोई नया आइडिया नहीं है। इस कमेटी का प्रस्ताव पहली बार केंद्रीय बजट 2026-27 में 1 फरवरी को रखा गया था। बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा था कि सरकार एक ऐसी कमेटी बनाएगी जो वित्तीय क्षेत्र की व्यापक समीक्षा करेगी और उसे भारत के अगले विकास चरण के साथ जोड़ेगी, साथ ही वित्तीय स्थिरता, समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण को भी सुरक्षित रखेगी।
मेगा बैंकों की जरूरत क्यों है?
सवाल है कि मेगा बैंकों की जरूरत क्यों है? इसका जवाब है स्केल। आज भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन एनर्जी, सेमीकंडक्टर और डिफेंस जैसे सेक्टर्स में लाखों करोड़ के प्रोजेक्ट्स आ रहे हैं। एक अकेला बैंक इतना बड़ा लोन नहीं दे सकता। दुनिया में अमेरिका के JPMorgan और चीन के ICBC जैसे बैंकों की बैलेंस शीट 4 से 5 ट्रिलियन डॉलर की है, जबकि हमारे सबसे बड़े बैंक की बैलेंस शीट अभी भी छोटी है। विकसित भारत के लिए हमें भी ऐसे बड़े ग्लोबल बैंकों की जरूरत है।
कमेटी का फोकस क्या होगा?
इस कमेटी का काम तीन मुख्य पिलर्स पर होगा। पहला है क्रेडिट एक्सेस को बढ़ाना। आज भी MSMEs और स्टार्टअप्स को लोन लेने में दिक्कत होती है। दूसरा है फाइनेंशियल इन्क्लूजन, यानी 2047 तक हर गांव और हर व्यक्ति तक बैंकिंग पहुंचाना। और तीसरा है फाइनेंशियल स्टेबिलिटी और कस्टमर प्रोटेक्शन, ताकि बैंक बड़े भी बनें और ग्राहकों का पैसा भी सुरक्षित रहे। इस समीक्षा में बैंक और NBFCs दोनों शामिल होंगे।
आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
यह सुधार ऐसे समय में आ रहा है जब भारतीय बैंकिंग सेक्टर अपने सबसे मजबूत दौर में है। बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत है, NPA ऐतिहासिक निचले स्तर पर है और मुनाफा रिकॉर्ड हाई पर है। इसी मजबूत नींव पर सरकार अगले 20 साल की इमारत बनाना चाहती है। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा। बिजनेस लोन और होम लोन लेना और आसान होगा, गांवों में डिजिटल बैंकिंग और मजबूत होगी और युवाओं के लिए नई नौकरियों के अवसर बनेंगे।
