BFSI ( Banking, Financial Services and Insurance) सेक्टर में फ्रॉड से लड़ाई अब बदल चुकी है, रिस्क चीफ्स ने कहा – अब अकेले बैंक नहीं, पूरी इंडस्ट्री को साथ लड़ना होगा

भारत में फाइनेंशियल फ्रॉड अब पहले जैसा नहीं रहा। ETBFSI ()और Jocata की हालिया राउंडटेबल “Siloed Controls to Convergence: AI-led Financial Crime Compliance” में देश के बड़े बैंकों के रिस्क चीफ्स ने साफ कहा – अब फ्रॉड से लड़ाई बैंक-लेवल कंट्रोल से निकलकर इंडस्ट्री-वाइड इंटेलिजेंस की ओर जा रही है।

इस चर्चा में Citibank, HSBC, SMFG, Aditya Birla Capital, Standard Chartered, HDFC Bank, RBL Bank, Bank of India जैसे बैंकों के फ्रॉड और रिस्क हेड्स शामिल हुए।

1. फ्रॉड अब अकेले अपराधी का काम नहीं, पूरा बिजनेस बन गया है

एक्सपर्ट्स का मानना है कि फ्रॉड अब संगठित हो चुका है। फ्रॉडस्टर्स नेटवर्क बनाकर काम करते हैं, डार्क वेब पर जानकारी शेयर करते हैं और तो और ‘Fraud-as-a-Service’ और ‘Money Laundering-as-a-Service’ जैसे मॉडल चला रहे हैं। वे बैंकों के कंट्रोल, थ्रेशोल्ड और खामियों को बारीकी से स्टडी करते हैं। 

2. हर डिजिटल सुविधा एक नई कमजोरी भी ला रही है

डिजिटल बैंकिंग, डिजिटल लेंडिंग और वीडियो KYC ने सुविधा तो बढ़ाई, लेकिन अटैक सरफेस भी बढ़ा दिया। फिजिकल वेरिफिकेशन कम होने से Identity Theft, Account Takeover और Synthetic Identity जैसे फ्रॉड तेजी से बढ़े हैं। थर्ड-पार्टी पार्टनरशिप से डेटा लीकेज का खतरा भी बड़ा मुद्दा बना। 

3. साइबर, फ्रॉड और AML अब अलग-अलग नहीं, एक ही क्राइम है

सबसे बड़ी बात जो निकलकर आई – अपराधी इसे एक ही ऑपरेशन की तरह करते हैं, लेकिन बैंक इसे 3-4 अलग टीमों में बांट देते हैं। पहले साइबर ब्रीच, फिर Identity चोरी, फिर फ्रॉड और अंत में मनी लॉन्ड्रिंग। यही गैप फ्रॉडस्टर्स का सबसे बड़ा हथियार है। 

4. अब रिएक्टिव नहीं, प्रोएक्टिव बनना होगा

अब तक बैंक फ्रॉड होने के बाद एक्शन लेते थे। रिस्क चीफ्स ने कहा कि अब Early-Warning System, Behavioural Analytics और Customer Vulnerability Profile बनाना होगा। कई बार फ्रॉड अमाउंट में नहीं, बल्कि कस्टमर के व्यवहार में दिखता है – खासकर सीनियर सिटीजन्स जैसे संवेदनशील ग्रुप में। 

5. AI अब ट्रेंड नहीं, जरूरत है

राउंडटेबल में एक बात पर सब सहमत थे – AI अब ‘nice to have’ नहीं, बेसलाइन जरूरत बन गया है। AI का इस्तेमाल Anomaly Detection, Transaction Monitoring और नई फ्रॉड Typologies पकड़ने में हो रहा है, जो पुराने Rule-Based सिस्टम नहीं पकड़ पाते। 

6. नई हकीकत – AI vs AI की जंग

जैसे बैंक AI से डिफेंस मजबूत कर रहे हैं, वैसे ही फ्रॉडस्टर्स भी Deepfake, AI-Generated Voice Cloning और Synthetic Identity से हमला तेज कर रहे हैं। यह अब AI बनाम AI की लड़ाई बन चुकी है। 

7. फिर भी ह्यूमन इंटेलिजेंस सबसे जरूरी

सिर्फ AI काफी नहीं है। अनुभवी बैंकर्स की वो instinct जो कहती थी “कुछ गड़बड़ है”, उसे डिजिटल ने खत्म कर दिया है। भविष्य का मॉडल होगा – Artificial Intelligence + Human Intelligence + Explainability। 

निष्कर्ष: भविष्य Convergence में है

सभी रिस्क चीफ्स का फाइनल कन्क्लूजन था – अब Fraud, Cyber Security और AML को एक ही Unified Intelligence Layer पर लाना होगा। शेयरिंग, कोलैबोरेशन और कॉमन डेटा एनवायरनमेंट के बिना इस लड़ाई को नहीं जीता जा सकता। फाइनेंशियल क्राइम मैनेजमेंट अब कॉस्ट सेंटर नहीं, बल्कि बोर्ड-लेवल प्रायोरिटी बन चुका है। 

Source: ETBFSI Roundtable – AI-Powered Fraud: The New Face of Financial Crime in India

By Deepak Singh

Founder and Financial Content Writer at PaisaKhabar.in. Covering Banking, Loans, Government Schemes, and Personal Finance in simple Hindi.

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