UPI के 10 साल: जब भारत ने दुनिया को डिजिटल पेमेंट करना सिखाया

11 अप्रैल 2016 को जब National Payments Corporation of India (NPCI) ने 21 बैंकों के साथ UPI लॉन्च किया था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि 10 साल में यह दुनिया का सबसे बड़ा पेमेंट सिस्टम बन जाएगा।

30 अप्रैल 2026 को जारी PIB की रिपोर्ट ने इस बात पर मुहर लगा दी है। International Monetary Fund (IMF) ने अपनी जून 2025 की रिपोर्ट में UPI को transaction volume के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा retail fast-payment system माना है।

10 साल का सफर आंकड़ों में – PIB रिपोर्ट

PIB के अनुसार UPI की ग्रोथ किसी क्रांति से कम नहीं है:

  • शुरुआत से आज तक: पहले महीने में सिर्फ 373 transactions से बढ़कर अब महीने के 2000 करोड़ से ज्यादा transactions
  • सालाना ग्रोथ: FY 2016-17 में 2 करोड़ transactions से बढ़कर FY 2025-26 में 24,162 करोड़ transactions – लगभग 12,000 गुना बढ़ोतरी
  • पैसों के मामले में: 0.07 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 314 लाख करोड़ रुपये – 4000 गुना से ज्यादा की ग्रोथ
  • रोज का हिसाब: रोजाना औसतन 66 करोड़ लेन-देन और 86 हजार करोड़ रुपये का कारोबार
  • रिकॉर्ड: मार्च 2026 में एक महीने में सबसे ज्यादा 2264 करोड़ transactions
  • बैंकों की भागीदारी: 21 बैंकों से शुरू होकर आज 703 बैंक UPI पर Live हैं
  • भारत में दबदबा: भारत के कुल डिजिटल पेमेंट का 85% हिस्सा अकेले UPI का है

दुनिया के सामने कहां खड़ा है अपना UPI? – International Comparison

यहीं पर कहानी और भी बड़ी हो जाती है। ACI Worldwide की रिपोर्ट ‘Prime Time for Real-Time 2024’ के अनुसार दुनिया के कुल real-time पेमेंट का 49% हिस्सा अकेले भारत के UPI का है।

दुनिया के टॉप 5 सिस्टम देखिए:

1. भारत (UPI) – 129.3 बिलियन transactions – 49% शेयर – No.1
2. ब्राजील (PIX) – 37.4 बिलियन transactions – 14% शेयर
3. थाईलैंड (PromptPay) – 20.4 बिलियन transactions – 8% शेयर
4. चीन (IBPS) – 17.2 बिलियन transactions – 6% शेयर
5. दक्षिण कोरिया – 9.1 बिलियन transactions

मतलब, भारत का UPI अकेले ब्राजील, थाईलैंड, चीन और दक्षिण कोरिया – इन चारों देशों के सिस्टम को मिलाकर भी उससे दोगुना बड़ा है।

अमेरिका और यूरोप क्यों पीछे रह गए?
अमेरिका ने अपना FedNow सिस्टम अभी जुलाई 2023 में लॉन्च किया है, यानी UPI से 7 साल बाद। UK का Faster Payments 2008 से चल रहा है लेकिन उसका volume UPI के सामने बहुत छोटा है। IMF के अनुसार UPI की सफलता का कारण है – एक QR पर सभी बैंकों का चलना, सरकार और RBI का पूरा सपोर्ट और आसान इंटरफेस।

UPI का इस्तेमाल कौन कर रहा है?

UPI दो तरह से सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है:

1. P2M (Person to Merchant) – 63% Volume: दुकान, ऑटो, चाय की टपरी पर रोजमर्रा का पेमेंट। इनमें 86% पेमेंट 500 रुपये से कम के होते हैं।
2. P2P (Person to Person) – 71% Value: एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को बड़ा अमाउंट भेजना।

यही वजह है कि UPI अमीर-गरीब और शहर-गांव का फर्क खत्म कर चुका है।

अब UPI 8 देशों में

UPI अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। यह 8 देशों में लाइव है:
UAE, Singapore, France, Bhutan, Nepal, Sri Lanka, Mauritius और Qatar

सिंगापुर के PayNow के साथ UPI का जुड़ना दुनिया का पहला cross-border real-time लिंक है, जिससे अब सिंगापुर से भारत में तुरंत पैसा भेजा जा सकता है।

निष्कर्ष

UPI ने साबित कर दिया कि भारत सिर्फ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाला देश नहीं, बल्कि दुनिया को रास्ता दिखाने वाला देश है। 10 साल में कैश से QR तक का यह सफर अभी तो सिर्फ शुरुआत है।

Source: PIB Delhi, Ministry of Finance (Release ID: 2257087), IMF Report June 2025, ACI Worldwide Report 2024

By Deepak Singh

Founder and Financial Content Writer at PaisaKhabar.in. Covering Banking, Loans, Government Schemes, and Personal Finance in simple Hindi.

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