Paisa Khabar शेयर बाज़ार विशेष: यदि आप शेयर बाजार के माध्यम से Gold ETF, Nifty BeES, Bank BeES, Silver ETF या किसी भी सेक्टोरल ईटीएफ (Exchange Traded Funds) में नियमित निवेश या ट्रेडिंग करते हैं, तो यह खबर आपके लिए अत्यंत आवश्यक है। सेबी (SEBI) और स्टॉक एक्सचेंजों (NSE, BSE) द्वारा घोषित किए गए नए ईटीएफ ट्रेडिंग दिशानिर्देश 7 सितंबर 2026 से अनिवार्य रूप से लागू होने जा रहे हैं।
इन नए नियमों का प्राथमिक उद्देश्य ईटीएफ के बाजार भाव (Market Price) और उसके वास्तविक शुद्ध परिसंपत्ति मूल्य (iNAV – Indicative Net Asset Value) के बीच आने वाले असंतुलन (Tracking Error & Discrepancy) को रोकना और खुदरा निवेशकों को अत्यधिक उतार-चढ़ाव से बचाना है।
📌 7 सितंबर से बदलने वाले 3 सबसे बड़े ईटीएफ नियम
- 1. iNAV आधारित डायनामिक प्राइस बैंड्स (Dynamic Price Bands): अब ईटीएफ पर प्राइस बैंड केवल पिछले दिन के क्लोजिंग प्राइस पर तय नहीं होंगे, बल्कि दिनभर में अपडेट होने वाले रियल-टाइम iNAV (इंट्राडे एनएवी) के आधार पर तय होंगे। इससे असामान्य सर्किट या मैनिपुलेशन नहीं हो सकेगा।
- 2. स्पेशल कॉल ऑक्शन सेशन (Special Call Auction Mechanism): यदि किसी ईटीएफ में लिक्विडिटी की भारी कमी होती है या मार्केट में अचानक बड़ा गैप आता है, तो एक्सचेंज प्राइस डिस्कवरी के लिए स्पेशल कॉल ऑक्शन आयोजित करेंगे, जिससे फेयर वैल्यू पर ही खरीद-बिक्री हो।
- 3. मार्केट मेकर्स (Authorized Participants) के लिए सख्त लिक्विडिटी नियम: ईटीएफ जारी करने वाले फंड हाउसों और अधिकृत प्रतिभागियों को ट्रेडिंग सत्र के दौरान अनिवार्य रूप से बिड-आस्क स्प्रेड (Bid-Ask Spread) को न्यूनतम सीमा में बनाए रखना होगा, ताकि खुदरा निवेशक बिना किसी नुकसान के जब चाहें अपनी यूनिट्स बेच सकें।
📊 ईटीएफ ट्रेडिंग सुधार: पहले vs अब
| फीचर / नियम | पुराना नियम | 7 सितंबर से नया नियम 2026 |
|---|---|---|
| प्राइस बैंड की गणना | केवल क्लोजिंग भाव पर आधारित | रियल-टाइम iNAV पर डायनामिक आधारित |
| असामान्य उतार-चढ़ाव पर सुरक्षा | सीमित नियंत्रण, कभी-कभी गलत भाव पर ट्रेड | स्पेशल कॉल ऑक्शन से सही भाव निर्धारण |
| गोल्ड व सिल्वर ईटीएफ में स्प्रेड | कभी-कभी 2% से 3% का बड़ा अंतर | कड़े स्प्रेड नियम, फेयर वैल्यू अनिवार्य |
💡 रिटेल निवेशकों के लिए क्या बदलेगा?
- गोल्ड और इंडेक्स ईटीएफ में सुरक्षित निवेश: गलत भाव पर आर्डर एग्जीक्यूट होने का खतरा पूरी तरह समाप्त होगा।
- बेहतर लिक्विडिटी: खरीदार और विक्रेता को तुरंत सही मार्केट रेट मिलेगा।
- पारदर्शिता में बढ़ोतरी: ब्रोकरेज ऐप्स (Zerodha, Groww, AngelOne आदि) पर ईटीएफ के iNAV और मार्केट प्राइस का अंतर साफ-साफ दिखेगा।
