LIVE BAZAAR: NIFTY 50: 24,547.40 (+586.80) SENSEX: 79,458.05 (+2156.65) GOLD (24K): ₹1,45,340 (+₹1,910) USD/INR: ₹94.54
₹
PAISAKHABAR.in
📸 👍
🔥 होम 🧮 स्मार्ट कैलकुलेटर 📈 आज का बाजार 🏛️ सरकारी योजना 📋 वैकेंसी 💰 बचत-SIP 🏦 बैंक-लोन 🛡️ फ्रॉड अलर्ट 💼 बिजनेस 🌐 सभी
← होमपेज पर वापस जाएं
News • PaisaKhabar Desk • 24 अक्टूबर 2026 | 08:57 PM IST

पीयूष गोयल: छोटे व्यवसायों के लिए निर्यात प्रमाणन का पूरा खर्च उठाएगी सरकार

पीयूष गोयल: छोटे व्यवसायों के लिए निर्यात प्रमाणन का पूरा खर्च उठाएगी सरकार

नई दिल्ली (PaisaKhabar News Desk): वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बर्लिन में एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान घोषणा की है कि केंद्र सरकार निर्यात प्रोत्साहन मिशन (ईपीएम) के तहत सूक्ष्म और छोटे उद्यमों (MSMEs) के लिए महंगे निर्यात प्रमाणन और यूरोपीय नियमों के अनुपालन का पूरा खर्च उठाएगी। पिछले साल नवंबर में छह वित्त वर्षों के लिए स्वीकृत 25,060 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय वाले इस महत्वाकांक्षी मिशन का उद्देश्य भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहुंच को मजबूत करना है। इस व्यापक पैकेज के तहत 'निर्यात प्रोत्साहन' उप-योजना के लिए 10,401 करोड़ रुपये और 'निर्यात दिशा' उप-योजना के लिए 14,659 करोड़ रुपये का स्पष्ट वित्तीय प्रावधान किया गया है, जिससे देश के लाखों छोटे निर्माताओं को भारी अनुपालन लागत से सीधी राहत मिलेगी।

📌 मुख्य बिंदु (Key Highlights):

  • वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने घोषणा की है कि सरकार निर्यात प्रोत्साहन मिशन के तहत एमएसएमई के महंगे प्रमाणन का पूरा खर्च उठाएगी।
  • सरकार ने छह वित्त वर्षों के लिए 25,060 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मिशन को मंजूरी दी है, जिसमें 10,401 करोड़ रुपये प्रोत्साहन और 14,659 करोड़ रुपये दिशा के लिए हैं।
  • सूक्ष्म एवं छोटे उद्यमों के लिए यूरोपीय संघ के नियमों जैसे सीबीएएम और ईयूडीआर के अनुपालन की लागत पूरी तरह सरकार वहन करेगी।
  • मौजूदा और नए निर्यातक प्रमाणन संबंधी सहायता के लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के आधिकारिक पोर्टल से संपर्क कर सकते हैं।

पीयूष गोयल ने की घोषणा, एमएसएमई का निर्यात प्रमाणन खर्च उठाएगी सरकार

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की इस ऐतिहासिक घोषणा से देश के सूक्ष्म और छोटे उद्यमों (MSMEs) को वैश्विक बाजारों में अपनी पैठ मजबूत करने का एक स्वर्णिम अवसर मिल गया है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंचों और बर्लिन में आयोजित बैठकों के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेशी मानकों और तकनीकी प्रमाणनों का भारी वित्तीय बोझ अब छोटे कारोबारियों की राह नहीं रोकेगा। सरकार ने निर्यात प्रोत्साहन मिशन (EPM) के जरिए यह सुनिश्चित किया है कि वैश्विक व्यापार में भाग लेने वाले हर छोटे निर्माता को तकनीकी और वित्तीय संबल मिले। इस पहल से भारत के कृषि और मत्स्य उत्पादों समेत लगभग 5 लाख करोड़ रुपये के निर्यात को नई गति मिलेगी और जर्मनी जैसी अर्थव्यवस्थाओं में कार्यरत लगभग 2,000 भारतीय कंपनियों को भी वैश्विक नियमों के अनुरूप ढलने में मदद मिलेगी।

वैश्विक व्यापार के बदलते दौर में यूरोपीय संघ के कड़े नियम भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे थे, जिसे दूर करने के लिए वाणिज्य मंत्रालय ने यह बड़ा कदम उठाया है। इस मिशन के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता से न केवल अनुपालन प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि छोटे व्यापारी बिना किसी अतिरिक्त बोझ के आधुनिक वैश्विक मानकों को पूरा कर सकेंगे। मंत्रालय के इस रणनीतिक कदम से देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों के एमएसएमई भी अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों का पालन करने में सक्षम होंगे। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के माध्यम से इस पूरी प्रक्रिया को सुचारूप से संचालित किया जा रहा है, ताकि हर पात्र उद्यमी तक पारदर्शी तरीके से सरकारी सहायता पहुंच सके और देश का निर्यात ग्राफ सुदृढ़ हो सके।

25,060 करोड़ रुपये के ईपीएम मिशन के तहत दो उप-योजनाओं का प्रावधान

पिछले साल नवंबर में सरकार द्वारा स्वीकृत 25,060 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय वाले निर्यात प्रोत्साहन मिशन (EPM) को छह वित्त वर्षों की लंबी अवधि के लिए संरचित किया गया है। इस वृहद वित्तीय खाके को दो प्रमुख उप-योजनाओं में विभाजित किया गया है, जिसमें 'निर्यात प्रोत्साहन' उप-योजना के लिए 10,401 करोड़ रुपये और 'निर्यात दिशा' उप-योजना के लिए 14,659 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट निर्धारित किया गया है। यह संरचित आवंटन इस बात का प्रमाण है कि सरकार केवल अल्पकालिक राहत देने के बजाय दीर्घकालिक और टिकाऊ वैश्विक व्यापारिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना चाहती है। इन फंडों का उपयोग छोटे उद्योगों को तकनीकी उन्नयन, वैश्विक प्रमाणन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भागीदारी के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने में किया जाएगा।

वैश्विक बाजार में यूरोपीय संघ के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) और वनोन्मूलन विनियमन (EUDR) जैसे कड़े विनियामक प्रावधानों का सामना करने के लिए यह बजट रीढ़ की हड्डी साबित होगा। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान यूरोपीय संघ को होने वाला निर्यात 72.4 अरब अमेरिकी डॉलर (जो पिछले वर्ष के 75.85 अरब अमेरिकी डॉलर की तुलना में 4.57 प्रतिशत घटकर दर्ज हुआ था) को फिर से पटरी पर लाने और सकारात्मक विकास दर हासिल करने में यह मिशन अहम भूमिका निभाएगा। सरकार की यह वित्तीय प्रतिबद्धता यह सुनिश्चित करती है कि यूरोपीय नियमों की जटिलता और महंगी अनुपालन प्रक्रिया के कारण भारतीय सूक्ष्म और छोटे उद्यमों का निर्यात बाधित न हो, और वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती से टिके रहें।

यूरोपीय संघ के कड़े नियमों और सीबीएएम अनुपालन पर विशेष रणनीतिक फोकस

वर्तमान वैश्विक व्यापार परिदृश्य में यूरोपीय देशों द्वारा लागू किए गए कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) और यूरोपीय संघ वनोन्मूलन विनियमन (EUDR) जैसे नियम भारतीय निर्यातकों के लिए अनुपालन की दृष्टि से बेहद खर्चीले साबित हो रहे हैं। इन तकनीकी और पर्यावरणीय अनुपालनों को पूरा करने में भारी धनराशि खर्च होती है, जिसे उठाने में सूक्ष्म और छोटे उद्यम (MSMEs) अक्सर असमर्थ होते हैं। वाणिज्य मंत्रालय की नई योजना के तहत इन विशिष्ट यूरोपीय नियमों के अनुपालन की शत-प्रतिशत लागत सरकार द्वारा वहन की जाएगी, जबकि अन्य बड़े कारोबारों को उनकी श्रेणी और टर्नओवर के आधार पर आनुपातिक सहायता प्रदान की जाएगी। इस नीतिगत निर्णय से भारतीय विनिर्माण क्षेत्र को यूरोपीय बाजार में एक समान और प्रतिस्पर्धी मंच प्राप्त होगा।

जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों में भारतीय उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच यह विनियामक सहायता द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी। जर्मनी में पहले से ही लगभग 2,000 भारतीय कंपनियां सक्रिय रूप से कारोबार कर रही हैं, और सरकार के इस समर्थन से नई कंपनियों के लिए भी यूरोपीय मानकों को पार करना बेहद सुगम हो जाएगा। यह विश्लेषणात्मक ढांचा न केवल भारतीय निर्यातकों को अनुपालन दंड से बचाएगा बल्कि उन्हें पर्यावरण-अनुकूल और संधारणीय (sustainable) उत्पादन पद्धतियों को अपनाने के लिए भी प्रेरित करेगा। इस प्रकार, यह नीति देश के समग्र निर्यात ढांचे को आधुनिक बनाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की साख को और अधिक मजबूत करती है।

डीजीएफटी पोर्टल के माध्यम से प्रमाणन सहायता प्राप्त करने की आधिकारिक प्रक्रिया

सूक्ष्म और छोटे उद्यमों (MSMEs) के लिए निर्यात प्रमाणन और यूरोपीय नियमों के अनुपालन का पूरा खर्च प्राप्त करने हेतु विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने एक पारदर्शी और डिजिटल आवेदन प्रक्रिया निर्धारित की है। सभी पात्र निर्यातक आधिकारिक सरकारी पोर्टलों के जरिए अपनी पात्रता सत्यापित कर सकते हैं और वित्तीय सहायता के लिए दावा प्रस्तुत कर सकते हैं।

इस आधिकारिक योजना का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित 4 चरणों का पालन करना अनिवार्य है:

  • 1. वैध निर्यातक पंजीकरण: उद्यम पोर्टल और विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की आधिकारिक वेबसाइट पर सक्रिय आयातक-निर्यातक कोड (IEC) के साथ अपना पंजीकरण अपडेट करें।
  • 2. प्रमाणन दस्तावेज तैयार करना: यूरोपीय संघ के सीबीएएम (CBAM) या ईयूडीआर (EUDR) अनुपालन से जुड़े तकनीकी परीक्षण और प्रमाणन दस्तावेजों का सटीक आकलन कराएं।
  • 3. ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत करना: DGFT पोर्टल पर उपलब्ध निर्यात प्रोत्साहन मिशन (EPM) के विशेष अनुभाग में जाकर अपनी कंपनी का दावा फॉर्म ऑनलाइन भरें और शुल्क रसीद अपलोड करें।
  • 4. सत्यापन और प्रत्यक्ष भुगतान: वाणिज्य मंत्रालय और संबंधित प्राधिकारी द्वारा दस्तावेजों के सत्यापन के बाद प्रमाणन की पूरी राशि सीधे एमएसएमई इकाई के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाएगी।
  • चरण 5: उद्यम पोर्टल और DGFT की वेबसाइट पर सक्रिय IEC कोड के साथ अपना पंजीकरण अपडेट करें।
  • चरण 6: यूरोपीय संघ के सीबीएएम या ईयूडीआर अनुपालन से जुड़े तकनीकी परीक्षण दस्तावेज तैयार कराएं।
  • चरण 7: DGFT पोर्टल पर ईपीएम मिशन के विशेष अनुभाग में जाकर दावा फॉर्म ऑनलाइन भरें और रसीद अपलोड करें।
  • चरण 8: दस्तावेजों के सत्यापन के बाद प्रमाणन की पूरी राशि सीधे एमएसएमई इकाई के खाते में प्राप्त करें।
🧮 PAISAKHABAR मुफ़्त फाइनेंशियल टूल्स

अपने पैसे, टैक्स और क्लेम की 5 सेकंड में लाइव गणना करें

सभी कैलकुलेटर देखें ➔
📋 संपादकीय सत्यापन एवं वित्तीय अस्वीकरण (Editorial Verification & Disclaimer):

यह विश्लेषण PaisaKhabar Financial Research Desk द्वारा आधिकारिक सरकारी अधिसूचनाओं, RBI/SEBI/IRDAI दिशानिर्देशों और बाजार के प्रमाणित आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है। यह लेख केवल वित्तीय जागरूकता और शैक्षिक जानकारी के लिए है; किसी भी निवेश या बीमा निर्णय से पूर्व अपने SEBI-पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।

संबंधित खबरें व वित्तीय विश्लेषण

और पढ़ें ➔

PaisaKhabar — निष्पक्ष और सटीक वित्तीय विश्लेषण

हर खबर सीधे भारतीय शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और अर्थव्यवस्था से।

सभी खबरें देखें ➔