बैंकों में पड़ा है हजारों करोड़ और लेने वाला कोई नहीं! सोशल मीडिया पर ₹98,073 करोड़ का आंकड़ा वायरल है, लेकिन सरकार ने संसद में जो असली आंकड़ा दिया है वो है ₹67,000 करोड़ से ज्यादा।
सरकारी आंकड़ा क्या है?
30 जून 2025 तक पब्लिक और प्राइवेट बैंकों में अनक्लेम्ड डिपॉजिट ₹67,000 करोड़ से ज्यादा हो चुका है। इसमें सरकारी बैंकों ने ₹58,330.26 करोड़ और प्राइवेट बैंकों ने ₹8,673.72 करोड़ DEA फंड में ट्रांसफर किया है। सबसे ज्यादा SBI में ₹19,329.92 करोड़ है, उसके बाद PNB और Canara Bank।
पैसा अनक्लेम्ड कैसे बनता है?
RBI के नियम के मुताबिक सेविंग या करंट अकाउंट जो 10 साल तक ऑपरेट नहीं हुआ, या FD मैच्योरिटी के 10 साल बाद भी क्लेम नहीं हुई, उसे अनक्लेम्ड मानकर RBI के DEA फंड में ट्रांसफर कर दिया जाता है। ये पैसा RBI के पास सेफ रहता है, गायब नहीं होता।
अब RBI ने 5 बड़े निर्देश दिए हैं:
- लिस्ट पब्लिश करो: बैंकों को अपनी वेबसाइट पर अनक्लेम्ड अकाउंट्स की लिस्ट प्रकाशित करने का निर्देश दिया है।
- वारिसों को ढूंढो: बैंकों को मृत खाताधारकों के वैध वारिसों को सक्रिय रूप से खोजने और शिकायत सिस्टम मजबूत करने को कहा गया है।
- गांव-गांव अभियान: ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अक्टूबर से दिसंबर तक विशेष आउटरीच पहल चलेगी ताकि लोगों को उनका पैसा लौटाया जा सके।
- 30-40% निपटान का टारगेट: सरकार ने सभी सरकारी बैंकों को निर्देश दिया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में निष्क्रिय खातों का कम से कम 30 से 40% निपटान किया जाए।
- UDGAM पोर्टल और इनाम: RBI ने UDGAM पोर्टल (https://udgam.rbi.org.in) बनाया है जहाँ फिलहाल 30 बैंक शामिल हैं और बैंकों के लिए इनाम योजना शुरू की है ताकि वे ग्राहकों को ढूंढ-ढूंढ कर पैसा लौटाएं। RBI लोकल भाषा में प्रचार करने को भी कह रहा है।
आप कैसे चेक करें आपका पैसा तो नहीं पड़ा?
- अपने बैंक की वेबसाइट पर जाएं – Unclaimed Deposit सेक्शन देखें।
- सीधे RBI के UDGAM पोर्टल पर जाकर नाम, PAN से सर्च करें।
- अगर नाम है तो अपनी होम ब्रांच में KYC, पासबुक, और अगर वारिस हैं तो Legal Heir Certificate लेकर जाएं।
पिछले 3 साल में ही बैंकों ने ₹10,000 करोड़ से ज्यादा लोगों को वापस किया है। तो अपना UDGAM पर जरूर चेक करें।
FAQ – अनक्लेम्ड डिपॉजिट ₹67,000 करोड़
Q1. बैंकों में अनक्लेम्ड डिपॉजिट क्या होता है?
A. RBI के नियम के मुताबिक अगर आपका सेविंग या करंट अकाउंट 10 साल तक ऑपरेट नहीं हुआ, या FD मैच्योरिटी के 10 साल बाद भी क्लेम नहीं हुई, तो उसे अनक्लेम्ड मान लिया जाता है और बाद में RBI के DEA फंड में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
Q2. भारतीय बैंकों में कुल कितना पैसा लावारिस पड़ा है?
A. सरकार ने संसद में बताया – 30 जून 2025 तक ₹67,000 करोड़ से ज्यादा अनक्लेम्ड डिपॉजिट है। इसमें सरकारी बैंकों का ₹58,330.26 करोड़ और प्राइवेट बैंकों का ₹8,673.72 करोड़ है। सबसे ज्यादा SBI में ₹19,329.92 करोड़ पड़ा है। आपका वायरल ₹98,073 करोड़ वाला आंकड़ा सभी फाइनेंशियल सेक्टर्स (इंश्योरेंस, म्यूचुअल फंड) को मिलाकर है।
Q3. क्या ये पैसा डूब जाता है?
A. नहीं, बिल्कुल नहीं। ये पैसा RBI द्वारा संचालित Depositor Education and Awareness (DEA) Fund Scheme, 2014 में सुरक्षित रहता है और आप कभी भी इसे ब्याज सहित वापस ले सकते हैं।
Q4. RBI ने बैंकों को क्या नए निर्देश दिए हैं?
A. RBI ने 5 सख्त निर्देश दिए हैं:
- अपनी वेबसाइट पर अनक्लेम्ड अकाउंट्स की लिस्ट प्रकाशित करें।
- मृत खाताधारकों के वारिसों को सक्रिय रूप से खोजें।
- गांव-देहात में अक्टूबर से दिसंबर तक विशेष आउटरीच कैंप लगाएं।
- FY 2025-26 में कम से कम 30-40% निपटान करें।
- लोकल भाषा में प्रचार करें और UDGAM पोर्टल को प्रमोट करें।
Q5. UDGAM पोर्टल क्या है और कैसे चेक करें?
A. UDGAM – Unclaimed Deposits Gateway To Access inforMation – RBI का पोर्टल है https://udgam.rbi.org.in जिस पर फिलहाल 30 बैंक शामिल हैं। आप नाम, PAN, Voter ID, DOB डालकर सर्च कर सकते हैं कि आपका कोई पुराना पैसा तो नहीं पड़ा।
Q6. अनक्लेम्ड पैसा कैसे वापस लें?
A.
Step 1 – UDGAM या बैंक की वेबसाइट पर अपना नाम चेक करें।
Step 2 – जिस बैंक में पैसा है, उसकी किसी भी ब्रांच में जाएं।
Step 3 – KYC, पासबुक, ID Proof दें। अगर खाताधारक की मृत्यु हो गई है तो Legal Heir Certificate / Succession Certificate लगेगा।
Step 4 – बैंक 15 दिन के अंदर पैसा वापस आपके अकाउंट में डाल देगा।
Q7. क्या परिवार वाले क्लेम कर सकते हैं?
A. हां। RBI ने बैंकों को शिकायत निवारण तंत्र मजबूत करने और वारिसों को ढूंढने का आदेश दिया है। वारिस Death Certificate और वारिस प्रमाण पत्र देकर क्लेम कर सकते हैं।
Q8. प्राइवेट बैंक भी इसमें हैं क्या?
A. हां। प्राइवेट बैंकों ने भी कुल मिलाकर 9,000 करोड़ रुपए DEA फंड में ट्रांसफर किए हैं, जिसमें ICICI बैंक (₹2,063 करोड़), HDFC बैंक (₹1,610 करोड़) और Axis Bank सबसे आगे हैं।
