Paisa Khabar म्यूचुअल फंड विशेष: देश के 15 करोड़ से अधिक म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) निवेशकों के लिए पूंजी बाजार नियामक SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) की ओर से एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक प्रस्ताव सामने आया है। SEBI ने कैश मार्केट में म्यूचुअल फंड स्कीमों के लिए ‘नेट सेटलमेंट ऑफ फंड्स’ (Net Settlement of Funds) की अनुमति देने को लेकर एक विस्तृत कंसल्टेशन पेपर जारी किया है।
इस नए तंत्र के लागू होने के बाद, म्यूचुअल फंड निवेशकों को अपनी यूनिट्स रिडीम (Redeem) करने पर पैसे के लिए 2 से 3 दिन (T+2 / T+1) का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि रिडेम्पशन का पैसा उसी दिन (Same-Day / T+0) सीधे बैंक खाते में क्रेडिट होने का मार्ग प्रशस्त होगा।
📌 SEBI के ‘Net Settlement’ प्रस्ताव के 4 मुख्य बिंदु
- 1. ग्रॉस सेटलमेंट से नेट सेटलमेंट की ओर बदलाव: वर्तमान में एएमसी (AMC) को हर खरीद और बिक्री का ग्रॉस सेटलमेंट करना पड़ता था। नेट सेटलमेंट से खरीद और बिक्री के कुल अंतर का ही भुगतान होगा, जिससे एसेट मैनेजमेंट कंपनियों की नकदी आवश्यकता (Liquidity Requirement) काफी घट जाएगी।
- 2. निवेशकों को तेज रिडेम्पशन पेआउट: फंड हाउसों को लिक्विडिटी की बचत होने से वे खुदरा निवेशकों के रिडेम्पशन अनुरोधों को उसी कारोबारी दिन प्रोसेस कर सकेंगे।
- 3. लेन-देन लागत में कमी (Lower Transaction Cost): नेटिंग मैकेनिज्म से क्लियरिंग कॉर्पोरेशन के शुल्क घटेंगे, जिसका अप्रत्यक्ष लाभ कम एक्सपेंस रेशियो (TER) के रूप में निवेशकों को मिलेगा।
- 4. 24 सितंबर 2026 तक जनता से मांगे गए सुझाव: सेबी ने इस प्रस्ताव पर बाजार हितधारकों और आम जनता से 24 सितंबर 2026 तक प्रतिक्रियाएं आमंत्रित की हैं।
📊 रिडेम्पशन सेटलमेंट टाइमलाइन: पहले vs अब
| म्यूचुअल फंड श्रेणी (Fund Category) | मौजूदा सेटलमेंट समय | नए प्रस्ताव के बाद संभावित समय |
|---|---|---|
| इक्विटी म्यूचुअल फंड (Equity MFs) | T+2 / T+1 कार्यदिवस | उसी दिन (T+0 / Same-Day) |
| लिक्विड व ओवरनाइट फंड्स | T+1 सुबह | तुरंत 2 घंटे के भीतर |
| डेट फंड्स (Debt Funds) | T+1 कार्यदिवस | T+0 (Same Day Credit) |
💡 आम SIP व म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए क्या फायदे होंगे?
- इमरजेंसी फंड में सुविधा: जब भी किसी परिवार को मेडिकल या आकस्मिक जरूरत होगी, म्यूचुअल फंड बेचते ही पैसा तुरंत खाते में आ जाएगा।
- स्विचिंग की आसानी: एक म्यूचुअल फंड स्कीम से निकलकर दूसरी स्कीम में उसी दिन निवेश करना संभव हो सकेगा, जिससे बाजार के मौकों का पूरा लाभ उठाया जा सकेगा।
- बैंकिंग लिक्विडिटी का विस्तार: पैसा अटकने के बजाय तेज गति से घूमेगा, जिससे डिजिटल निवेश का दायरा बढ़ेगा।
