नई दिल्ली (PaisaKhabar News Desk): भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने पूंजी बाजार में प्रशासनिक और सिविल कार्यवाही को सरल, पारदर्शी और त्वरित बनाने के उद्देश्य से ‘SEBI (Settlement of Administrative and Civil Proceedings) Regulations, 2026’ को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। इस व्यापक विनियामक सुधार के तहत बाजार नियामक ने ₹10 लाख या उससे कम की सेटलमेंट राशि वाले मामलों के लिए एक नया फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट रूट पेश किया है। इस नए तंत्र का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि छोटे मामलों को अब हाई पावर्ड एडवाइजरी कमेटी (HPAC) की लंबी समीक्षा प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा, बल्कि इंटरनल कमेटी (IC) की सिफारिश के बाद सीधे सेबी के होल-टाइम मेंबर्स (WTM) का पैनल अंतिम आदेश पारित करेगा। नियामक के इस रणनीतिक कदम से छोटे मार्केट पार्टिसिपेंट्स, सूचीबद्ध कंपनियों और निवेशकों को लंबी और खर्चीली कानूनी प्रक्रियाओं से तत्काल राहत मिलेगी।

📌 मुख्य बिंदु (Key Highlights):

  • सेबी ने ₹10 लाख या उससे कम के मामलों हेतु नया समयबद्ध फास्ट-ट्रैक रूट नोटिफाई किया है।
  • फास्ट-ट्रैक मामलों में HPAC स्टेज को बाईपास कर फाइल इंटरनल कमेटी से सीधे WTM पैनल को जाएगी।
  • रॉन्गफुल गेन्स (Disgorgement) को सेटलमेंट राशि से पूरी तरह अलग कर डबल-काउंटिंग समाप्त की गई है।
  • डिस्क्लोजर व तकनीकी चूक मामलों में सेबी द्वारा सीधे सेटलमेंट नोटिस भेजकर त्वरित समाधान दिया जाएगा।

सेबी सेटलमेंट रेगुलेशंस 2026: फास्ट-ट्रैक रूट और संरचनात्मक बदलाव

पूंजी बाजार नियामक सेबी ने अपने पुराने 2018 के निपटान ढांचे की गहन समीक्षा के बाद यह नया ढांचा तैयार किया है। पुराने नियमों के तहत हर छोटे-बड़े मामले को बहु-स्तरीय समितियों, विशेष रूप सेवानिवृत्त न्यायाधीशों वाली उच्चाधिकार प्राप्त सलाहकार समिति (HPAC) से होकर गुजरना पड़ता था, जिसके कारण मामूली उल्लंघनों के निपटारे में भी एक से दो वर्ष का समय लग जाता था। नए नियमों के अंतर्गत ₹10 लाख तक के मामलों के लिए इस दोहरी समीक्षा को समाप्त कर दिया गया है। अब इंटरनल कमेटी द्वारा जांच पूरी होते ही फाइल सीधे दो होल-टाइम मेंबर्स के पैनल के पास जाएगी, जिससे विवादों का निपटारा हफ्तों के भीतर संभव हो सकेगा।

इसके अलावा, सेबी ने उल्लंघन-आधारित फास्ट-ट्रैक रूट (Violation-Based Fast-Track) भी स्थापित किया है। इसके तहत यदि किसी कंपनी या ब्रोकर द्वारा विशिष्ट डिस्क्लोजर नियमों का उल्लंघन किया गया है, तो सेबी कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) के साथ ही सेटलमेंट नोटिस जारी कर सकेगा। आवेदक द्वारा निर्धारित समय-सीमा में ऑनलाइन भुगतान करने पर बिना किसी लंबी बहस के औपचारिक सेटलमेंट ऑर्डर जारी कर दिया जाएगा। इससे नियामक के कानूनी संसाधनों की भारी बचत होगी और वे गंभीर फ्रॉड व मार्केट मैनिपुलेशन मामलों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

डिसगॉर्जमेंट और सेटलमेंट राशि का नया वैज्ञानिक फॉर्मूला

नए रेगुलेशंस का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण सुधार ‘डिसगॉर्जमेंट’ (Disgorgement of Wrongful Gains) का पृथक्करण है। पुराने ढांचे में अक्सर अवैध लाभ या निवेशकों को हुए नुकसान को मुख्य सेटलमेंट राशि के भीतर ही जोड़ दिया जाता था, जिससे कई बार गणना में दोहराव (Double Counting) का विवाद खड़ा होता था। सेबी ने अब सेटलमेंट शर्तों को तीन स्पष्ट स्वतंत्र श्रेणियों में विभाजित कर दिया है: पहला- सेटलमेंट अमाउंट, दूसरा- रॉन्गफुल गेन्स का स्वतंत्र डिसगॉर्जमेंट, और तीसरा- रेमेडियल व रेगुलेटरी टर्म्स (RRT)।

सेटलमेंट राशि की गणना के लिए अब एक पारदर्शी बेस अमाउंट तय किया गया है, जो संबंधित सिक्योरिटीज कानून के तहत निर्धारित न्यूनतम वैधानिक पेनाल्टी से जुड़ा है। इसमें कार्यवाही के चरण, आवेदक के पिछले विनियामक रिकॉर्ड, उल्लंघन की गंभीरता और कानूनी लागतों के आधार पर समायोजन किया जाएगा। यदि आवेदक जांच के शुरुआती चरण में ही सेटलमेंट के लिए आगे आता है, तो उसे कम फॉर्मूला गुणक (Multiplier) का लाभ मिलेगा, जबकि देरी से आवेदन करने पर राशि बढ़ जाएगी।

सेबी सेटलमेंट रेगुलेशंस 2026 के प्रमुख वैधानिक प्रावधानों का विस्तृत विश्लेषण

नीचे दी गई शोध-आधारित तालिका में सेबी द्वारा नोटिफाइड नए सेटलमेंट नियमों, मौद्रिक सीमाओं, विनियामक चैनलों और बाजार सहभागियों पर उनके सीधे कानूनी प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है:

सेबी सेटलमेंट प्रावधान (2026) पात्रता व मौद्रिक सीमा प्रक्रिया व विनियामक चैनल बाजार व आवेदकों पर सीधा असर
मौद्रिक फास्ट-ट्रैक रूट ₹10 लाख या उससे कम की सेटलमेंट राशि HPAC स्टेज बाईपास; IC से सीधे WTM पैनल को फाइल छोटे मामलों में महीनों का समय घटकर कुछ हफ्तों में त्वरित निपटारा
उल्लंघन-आधारित फास्ट-ट्रैक विशिष्ट डिस्क्लोजर चूक व तकनीकी डिफॉल्ट सेबी सीधे सेटलमेंट नोटिस भेजेगा; भुगतान पर तत्काल आदेश बिना लंबी कानूनी सुनवाई के तत्काल विवाद का समाधान
डिसगॉर्जमेंट (Disgorgement) अनुचित लाभ (Wrongful Gains) या टाला गया नुकसान सेटलमेंट अमाउंट से अलग स्वतंत्र गणना; डबल-काउंटिंग खत्म पारदर्शी वसूली; निवेशकों को स्पष्ट वित्तीय जवाबदेही
रेमेडियल व रेगुलेटरी टर्म्स (RRT) गैर-मौद्रिक सुधारात्मक शर्तें (Voluntary Undertakings) व्यवहार सुधार और बाजार सुरक्षा की बाध्यकारी शर्तें भविष्य के उल्लंघनों की रोकथाम व बाजार साख की बहाली
बेस पेनल्टी फॉर्मूला सिक्योरिटीज एक्ट की न्यूनतम वैधानिक पेनाल्टी कार्यवाही के चरण, कानूनी लागत व देरी के अनुसार समायोजन तर्कसंगत और पूर्वानुमानित सेटलमेंट राशि का निर्धारण

तालिका के वैधानिक आंकड़ों से स्पष्ट है कि सेबी ने पुराने जटिल ढांचे को समाप्त कर एक आधुनिक और डेटा-आधारित सेटलमेंट व्यवस्था लागू की है। इससे पूंजी बाजार में अनुपालन की संस्कृति मजबूत होगी और मुकदमों के बोझ में भारी कमी आएगी।

सेबी पोर्टल पर नए सेटलमेंट आवेदन की आधिकारिक चरण-दर-चरण प्रक्रिया

यदि कोई पंजीकृत मध्यस्थ, सूचीबद्ध इकाई या निवेशक नए नियमों के तहत सेटलमेंट प्रक्रिया का लाभ उठाना चाहता है, तो उसे सेबी के आधिकारिक डिजिटल पोर्टल पर निम्नलिखित 4 चरणों का पालन करना होगा:

  • चरण 1: आधिकारिक सेबी पोर्टल (sebi.gov.in) पर ‘Settlement Proceedings’ टैब में जाकर अपने नोटिस नंबर और संस्थागत क्रेडेंशियल्स के साथ ऑनलाइन आवेदन दाखिल करें।
  • चरण 2: कारण बताओ नोटिस जारी होने के निर्धारित 60 दिनों के भीतर आवेदन शुल्क और मामले से संबंधित सभी प्राथमिक साक्ष्य व दस्तावेज अपलोड करें।
  • चरण 3: ₹10 लाख तक के मामलों में इंटरनल कमेटी (IC) द्वारा मूल्यांकित सेटलमेंट राशि और लागू डिसगॉर्जमेंट की गणना को स्वीकार कर डिजिटल भुगतान पूरा करें।
  • चरण 4: होल-टाइम मेंबर्स (WTM) के विशेष पैनल द्वारा समीक्षा के उपरांत औपचारिक सेटलमेंट ऑर्डर जारी होगा, जो सभी प्रशासनिक व सिविल कार्यवाही को अंतिम रूप से समाप्त कर देगा।

By Deepak Singh

Founder and Financial Content Writer at PaisaKhabar.in. Covering Banking, Loans, Government Schemes, and Personal Finance in simple Hindi.

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