🚨 PNB Mega Fraud Breaking: पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की ग्रेटर नोएडा स्थित ऐच्छर (Aichhar) शाखा में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और बचत खातों से करोड़ों रुपये की सनसनीखेज धोखाधड़ी का पर्दाफाश हुआ है। बैंक प्रबंधन ने कड़ा एक्शन लेते हुए शाखा प्रबंधक (Branch Manager) समेत सभी 12 कर्मचारियों को निलंबित (Suspend) कर दिया है। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने के बाद अब इस पूरे घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और एंटी-करप्शन विंग को सौंप दी गई है।
देश के दूसरे सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में धोखाधड़ी का यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने बैंकिंग धोखाधड़ी में ढीले आंतरिक नियंत्रण पर बैंकों को 100% हर्जाना भरने का सख्त निर्देश दिया था। ग्रेटर नोएडा की इस शाखा में जिन पीड़ितों का पैसा गायब हुआ है, वे अधिकांशतः स्थानीय किसान और ग्रामीण हैं, जिन्हें जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित जमीनों के बदले करोड़ों रुपये की मुआवजा राशि मिली थी।
1. घोटाले का तरीका: बिना जानकारी तोड़ी गईं फिक्स्ड डिपॉजिट (Modus Operandi)
पीड़ित खाताधारकों और ग्रामीणों द्वारा पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायतों के अनुसार, बैंक के भीतर यह संगठित फर्जीवाड़ा बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया:
- समय पूर्व FD का परिसमापन (Premature Liquidation): खाताधारकों को कानों-कान खबर हुए बिना उनकी कई वर्षों की फिक्स्ड डिपॉजिट को समय से पहले तुड़वाकर बचत खातों में डाला गया।
- डेबिट SMS अलर्ट गायब: पीड़ितों का कहना है कि जब खातों से लाखों-करोड़ों रुपये निकाले या दूसरे खातों में ट्रांसफर किए गए, तो उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबरों पर कोई SMS अलर्ट या OTP नहीं भेजा गया।
- आंतरिक पासवर्ड का दुरुपयोग: बैंक की प्राथमिक फॉरेंसिक ऑडिट में खुलासा हुआ है कि शाखा के एक कर्मचारी ने ब्रांच मैनेजर और अन्य सहकर्मियों के सिस्टम लॉगिन पासवर्ड का अनधिकृत इस्तेमाल किया और बाहरी सिंडिकेट के साथ मिलकर फंड्स की हेराफेरी की।
2. किसानों की मेहनत की कमाई पर डाका: जेवर एयरपोर्ट मुआवजा फंड्स
ग्रेटर नोएडा के जेवर, दादरी और आसपास के गांवों में हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर एक्सप्रेसवे, फिल्म सिटी और जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए जमीन अधिग्रहण हुआ था। सरकार द्वारा किसानों को दिए गए चेक इन्हीं स्थानीय राष्ट्रीयकृत बैंकों में जमा किए गए थे।
किसानों का मानना था कि सरकारी बैंक (PSB) में पैसा सबसे सुरक्षित रहेगा और इसी भरोसे उन्होंने जीवन भर की कमाई को 5 से 10 वर्षों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट में लॉक कर दिया था। जब एक किसान अपनी बेटी की शादी के लिए पैसा निकालने पहुंचा, तब जाकर खाते से करोड़ों गायब होने का यह महाघोटाला उजागर हुआ।
3. क्या कहता है RBI और सुप्रीम कोर्ट का कानून?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सर्कुलर और हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ द्वारा डिजिटल फ्रॉड पर दिए गए फैसले के अनुसार:
- जीरो लायबिलिटी (Zero Liability): यदि किसी ग्राहक के खाते से अनाधिकृत लेन-देन बैंक के कर्मचारियों की मिलीभगत, आंतरिक धोखाधड़ी या सिस्टम की सुरक्षा चूक के कारण होता है, तो ग्राहक की देयता (Liability) शून्य होती है।
- पूरा हर्जाना देने का दायित्व: बैंक को शिकायत मिलने के बाद तुरंत अंतरिम राहत देनी होती है और जांच के दौरान ग्राहक को उसके पूरे पैसे ब्याज सहित लौटाने के कानूनी निर्देश हैं।
- CBI की त्वरित कार्रवाई: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में ₹3 करोड़ से अधिक के किसी भी आंतरिक गबन के मामले को सीधे सीबीआई की बैंक सिक्योरिटीज एंड फ्रॉड सेल (BSFB) को रेफर किया जाता है।
- हर 3 महीने में बैंक जाकर अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) रसीद या पासबुक की फिजिकल एंट्री अवश्य कराएं।
- नेटबैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग ऐप में 'Active Deposits' सेक्शन में जाकर FD का करंट स्टेटस और मैच्योरिटी डेट जांचते रहें।
- यदि लंबे समय से बैंक का कोई SMS अलर्ट नहीं आ रहा है, तो तुरंत शाखा जाकर अपना मोबाइल नंबर दोबारा वेरीफाई कराएं।