नई कार का सपना हर किसी का होता है, लेकिन अक्सर खरीदार सिर्फ EMI देखकर हामी भर देते हैं, जबकि फाइनेंस की असली शर्तें छोटे अक्षरों में छिपी होती हैं। ब्याज, चार्ज, अवधि और अतिरिक्त पैकेज, ये सब मिलकर कार की कुल लागत को काफी बढ़ा सकते हैं।
गलती 1: सिर्फ EMI देखना, कुल लागत (Total Cost) नहीं देखना
लोग अक्सर लोन लेते समय केवल इंटरेस्ट रेट देखते हैं। लेकिन असली खर्च कुल पेमेंट में होता है। प्रोसेसिंग फीस, फाइल चार्ज, GST और अन्य चार्ज EMI में नहीं दिखते, लेकिन कुल लागत बढ़ा देते हैं। यही आंकड़ा बताएगा कि कार असल में कितनी महंगी पड़ रही है।
गलती 2: डाउन पेमेंट कम करना
शोरूम वाले 100% ऑन-रोड फाइनेंस का लालच देते हैं। यही सबसे महंगा पड़ता है।
एक्सपर्ट कहते हैं – “कार लोन लेते समय कोशिश करें कि आप ज्यादा से ज्यादा डाउन पेमेंट करें। जितनी ज्यादा आप डाउन पेमेंट करेंगे, उतना ही कम लोन का बोझ होगा। कार की कीमत के 20 प्रतिशत तक की डाउन पेमेंट जरूर करें।” आप जितनी ज्यादा डाउन पेमेंट करेंगे, उतनी ही कम आपकी EMI होगी और ब्याज भी कम देना पड़ेगा।
गलती 3: लोन की अवधि 7-8 साल तक खींचना
कम EMI के चक्कर में लोग 7 साल का लोन ले लेते हैं। “आपके लोन की अवधि जितनी ज्यादा होगी, आपको उतनी ही ज्यादा राशि बैंक को ब्याज के रूप में देनी पड़ेगी। ऐसे में कार लोन लेते समय कोशिश करें कि आपकी अवधि 4-5 साल से अधिक की न हो।” लोन की अवधि 5 साल तक ही रखें ताकि ब्याज का बोझ कम रहे।
गलती 4: प्रोसेसिंग फीस और हिडन चार्जेज को इग्नोर करना
ब्याज दर के साथ साथ अन्य चार्जिस जैसे प्रोसेसिंग फीस, GST, प्रीपेमेंट चार्ज, लेट EMI पेनल्टी पर भी नजर रखें और अपने लिए एक बेस्ट डील चुनें। कई बैंक 1% से 2% तक प्रोसेसिंग फीस + GST ले लेते हैं, जो 10 लाख की कार पर 15,000 तक बैठता है।
गलती 5: एक ही बैंक/शोरूम पर भरोसा करना और EMI को सैलरी से ज्यादा रखना
बैंक आपको ज्यादा लोन ऑफर करेगा, पर उतना ही लें जितना चुका सकें। कार लेने के बाद EMI के साथ मेंटेनेंस, फ्यूल और इंश्योरेंस का खर्च भी आता है। EMI आपकी सैलरी के 10-15% से अधिक नहीं होनी चाहिए, कुछ एक्सपर्ट के अनुसार 40-50% से ज्यादा तो बिल्कुल नहीं। कम से कम 3 बैंकों – SBI, HDFC, ICICI से कोटेशन जरूर लें और शोरूम की फाइनेंस स्कीम से तुलना करें।
बचने का स्मार्ट तरीका:
- हमेशा Total Interest Payable पूछें, सिर्फ EMI नहीं
- 20% डाउन पेमेंट का टारगेट रखें
- लोन 5 साल से ज्यादा न खींचें
- फोरक्लोजर चार्ज पहले ही लिखवा लें
