Paisa Khabar विशेष वित्तीय पड़ताल: भारतीय शेयर बाज़ार में मार्केट रेगुलेटर SEBI द्वारा हाल ही में लागू किया गया Closing Auction Session (CAS) अब खुदरा और एफएंडओ (F&O) ट्रेडर्स के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन चुका है। बाज़ार बंद होने के आखिरी 20 मिनट (दोपहर 3:15 से 3:35 PM) के दौरान स्पॉट और फ्यूचर्स के बीच भारी मिसमैच के कारण कॉल (Call) और पुट (Put) ऑप्शंस के प्रीमियम में अप्रत्याशित तबाही मच रही है।

इस पूरे मामले पर ज़ी बिज़नेस के मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी (Anil Singhvi) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में Twitter) पर एक बेहद आक्रामक रील और वीडियो पोस्ट साझा करते हुए तीखा सवाल उठाया है: “यह सेबी का CAS (क्लोजिंग ऑक्शन) है या फिर रिटेल ट्रेडर्स को बर्बाद करने वाला CHAOS?” आइए समझते हैं कि सिस्टम में आखिर क्या तकनीकी खामी है और एक्सपायरी के दिन ऑप्शंस ट्रेडर्स के पैसे कैसे डूब रहे हैं।

🔥 अनिल सिंघवी ने X (Twitter) पर क्या बड़ा खुलासा किया?

अनिल सिंघवी ने अपने वीडियो विश्लेषण में बताया कि सेबी ने जिस CAS व्यवस्था को ऑपरेटरों की चालाकी रोकने के लिए पेश किया था, वास्तव में वही व्यवस्था अब ऑपरेटरों के लिए खुदरा ट्रेडर्स को फंसाने का सबसे आसान हथियार बन गई है। उनके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • 1. स्पॉट और फ्यूचर्स का खतरनाक गैप (Divergence): 3:15 PM पर कैश सेगमेंट में लाइव खरीद-बिक्री बंद हो जाती है, जबकि F&O डेरिवेटिव्स 3:30 PM तक लाइव ट्रेड होते रहते हैं। कैश बंद होने के बाद फ्यूचर्स ऊपर भागता है या नीचे गिरता है, लेकिन उसका स्पॉट प्राइस 3:35 PM तक हवा में लटका रहता है।
  • 2. इन-द-मनी (ITM) ऑप्शंस का अचानक जीरो होना: 3:20 से 3:30 PM की ऑक्शन विंडो में जैसे ही स्पॉट प्राइस का अनुमान बदलता है, ₹50-₹60 में चल रहे कॉल या पुट ऑप्शन सेकंडों में ₹0.05 (शून्य) हो जाते हैं या फिर ओटीएम (OTM) ऑप्शंस अचानक रॉकेट बन जाते हैं।
  • 3. एक्सपायरी सेटलमेंट में भारी स्लिपेज: ट्रेडर्स को पता ही नहीं चलता कि उनका सौदा किस रेट पर कटेगा क्योंकि फाइनल क्लोजिंग प्राइस 3:35 PM पर घोषित होता है, जबकि ट्रेडिंग 3:30 PM पर ही समाप्त हो चुकी होती है।

अनिल सिंघवी का बयान (X Reel): “अगर किसी डॉक्टर की दवाई से मरीज की बीमारी ठीक होने के बजाय उसकी जान पर बन आए, तो तुरंत दवाई बदलनी चाहिए। ठीक वैसे ही, सेबी का CAS सिस्टम सुधार के नाम पर बाज़ार में एक ऐसा भ्रमजाल और ‘Chaos’ बन चुका है जिसने रिटेल ट्रेडर्स की कमर तोड़ दी है। इसे तुरंत रिव्यू करना चाहिए!”

⚙️ CAS सिस्टम में Call और Put में गड़बड़ी का असली गणित क्या है?

आम ट्रेडर्स के लिए इस तकनीकी झोल को समझना बहुत जरूरी है:

समय सीमा कैश / स्पॉट मार्केट (Spot) F&O डेरिवेटिव मार्केट (Futures & Options) Call-Put पर असर
सुबह 9:15 से दोपहर 3:15 PM सामान्य लाइव ट्रेडिंग जारी सामान्य लाइव ट्रेडिंग जारी सामान्य प्रीमियम मूवमेंट (ग्रीक फॉर्मूले के अनुसार)
दोपहर 3:15 से 3:20 PM लाइव ट्रेडिंग बंद (रेफरेंस प्राइस कैलकुलेशन) फ्यूचर्स में लगातार तेज खरीद-बिक्री जारी स्पॉट फ्रीज होने से ऑप्शन प्राइसेस में भटकाव शुरू
दोपहर 3:20 से 3:30 PM ऑक्शन विंडो (सिर्फ ऑर्डर्स जमा होते हैं, कोई सौदा नहीं कटता) लाइव ट्रेडिंग का आखिरी दौर (एक्सपायरी स्क्वायर-ऑफ) भारी अनिश्चितता: कॉल-पुट प्रीमियम में अप्रत्याशित स्पाइक्स व क्रैश
दोपहर 3:30 से 3:35 PM कंप्यूटर संतुलन मूल्य (Equilibrium Price) खोजता है बाज़ार बंद (ट्रेडिंग समाप्त) फाइनल सेटलमेंट पर अप्रत्याशित नुकसान / प्रॉफिट मिसमैच

📉 एक्सपायरी के दिन रिटेल ट्रेडर्स कैसे फंसे?

वीकली एक्सपायरी के दिन ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स की वैल्यू सीधे स्पॉट प्राइस के अंतिम क्लोजिंग भाव पर सेटल होती है। CAS सिस्टम के तहत:

  • केस 1 (कॉल बायर्स का नुकसान): दोपहर 3:14 बजे किसी शेयर का भाव ₹1000 था। ट्रेडर ने ₹1000 का Call ऑप्शन ₹15 में खरीदा। 3:15 बजे कैश बंद हुआ, लेकिन 3:25 बजे ऑक्शन पूल में ऑपरेटरों ने भारी सेलिंग ऑर्डर्स डंप कर दिए। 3:35 बजे जब इक्विलिब्रियम क्लोजिंग प्राइस निकला तो वह ₹998 निकला। नतीजा: ₹15 का कॉल ऑप्शन शून्य (₹0) हो गया और ट्रेडर को 100% घाटा हुआ।
  • केस 2 (ऑटो स्क्वायर-ऑफ का झटका): डिस्काउंट ब्रोकर्स ने 3:10 से 3:15 PM के बीच ही इंट्राडे सौदे काटने शुरू कर दिए, जिससे बाज़ार में आर्टिफिशियल लिक्विडिटी क्रैश आ गया और कॉल-पुट दोनों के बिड-आस्क स्प्रेड (Bid-Ask Spread) बहुत चौड़े हो गए।

🎯 सेबी (SEBI) और एक्सचेंजों के सामने 3 बड़े सवाल

  1. कैश और F&O का समय अलग क्यों? जब कैश सेगमेंट 3:15 बजे बंद होता है तो F&O डेरिवेटिव्स को 3:30 बजे तक क्यों चालू रखा जा रहा है? दोनों का ट्रेडिंग समय एक समान क्यों नहीं किया जाता?
  2. ऑक्शन मैनिपुलेशन पर क्या चेक है? 3:20 से 3:30 PM के बीच बड़े फंड्स द्वारा भारी डमी ऑर्डर्स डालकर रिटेल इनवेस्टर्स को पैनिक में लाने से रोकने के लिए क्या उपाय हैं?
  3. पुराना 30-मिनट VWAP फॉर्मूला क्या बेहतर नहीं था? पुराने सिस्टम में पिछले 30 मिनट का औसत भाव लिया जाता था, जिससे आखिरी 2-3 मिनट के स्पाइक का असर पूरे दिन के भाव पर नहीं पड़ता था।

Paisa Khabar ट्रेडर्स सुरक्षा गाइड: जब तक SEBI और NSE इस CAS व्यवस्था में आवश्यक संशोधन नहीं करते, तब तक सभी F&O और ऑप्शंस ट्रेडर्स को दोपहर 3:10 PM से पहले अपनी सभी इंट्राडे कॉल/पुट पोजीशन स्क्वायर-ऑफ कर लेनी चाहिए। 3:15 बजे के बाद एक्सपायरी हीरो-जीरो ट्रेड्स में बिल्कुल न फंसें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: CAS सिस्टम में 3:15 से 3:35 PM के बीच क्या होता है?
उत्तर: 3:15 PM पर कैश सेगमेंट की सामान्य ट्रेडिंग रुक जाती है। 3:20 से 3:30 PM के बीच ऑक्शन के लिए ऑर्डर्स जमा होते हैं और 3:35 PM पर मैचिंग के जरिए दिन का फाइनल क्लोजिंग प्राइस घोषित होता है।

Q2: क्या सेबी इस नए नियम में बदलाव करने जा रहा है?
उत्तर: अनिल सिंघवी और कई प्रमुख ब्रोकरेज हाउसेज द्वारा इस मुद्दे को ज़ोर-शोर से उठाए जाने के बाद उम्मीद की जा रही है कि सेबी और एक्सचेंज जल्द ही समय में तालमेल और ऑक्शन नियमों की समीक्षा करेंगे।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट मार्केट एक्सपर्ट्स के विचारों और हालिया तकनीकी घटनाक्रमों पर आधारित है। शेयर बाज़ार व एफएंडओ ट्रेडिंग जोखिमों के अधीन है। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सेबी पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।

By Deepak Singh

Founder and Financial Content Writer at PaisaKhabar.in. Covering Banking, Loans, Government Schemes, and Personal Finance in simple Hindi.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *