Paisa Khabar फ्रॉड अलर्ट स्पेशल: देश में ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी का एक बेहद खतरनाक और नया तरीका सामने आया है, जिसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest Scam) कहा जा रहा है। साइबर अपराधी फर्जी पुलिस अधिकारी, CBI अफसर, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) या कस्टम विभाग के नकली बैकड्रॉप लगाकर वीडियो कॉल करते हैं और लोगों को मनी लॉन्ड्रिंग या गैर-कानूनी पार्सल का झूठा डर दिखाकर उनके बैंक खातों से लाखों-करोड़ों रुपये ट्रांसफर करवा लेते हैं।

केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के साइबर विंग (I4C) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस संगठित साइबर अपराध को लेकर देश भर के नागरिकों के लिए सख्त चेतावनी और सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। आइए विस्तार से समझें कि यह स्कैम कैसे काम करता है और खुद को तथा अपने परिवार को कैसे सुरक्षित रखें।

🕵️ 1. कैसे काम करता है ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम?

स्कैमर्स एक बेहद सोची-समझी साइकोलॉजिकल स्क्रिप्ट के तहत आम नागरिकों को अपना शिकार बनाते हैं:

चरण (Step)ठगों का तरीका (Modus Operandi)शिकार पर असर
1. फर्जी कॉल (The Hook)कस्टम विभाग/FedEx/TRAI के नाम पर कॉल कर कहते हैं कि आपके आधार से बुक पार्सल में ड्रग्स या पासपोर्ट मिले हैं।व्यक्ति अचानक घबरा जाता है।
2. वीडियो कॉल ट्रांसफरकॉल को तुरंत ‘CBI या क्राइम ब्रांच’ के नकली पुलिस स्टेशन सेटअप वाले वीडियो कॉल पर ट्रांसफर करते हैं।वर्दी और नकली बैकग्राउंड देखकर व्यक्ति सच मान लेता है।
3. डिजिटल अरेस्ट की धमकीकहते हैं कि ‘आप डिजिटल अरेस्ट में हैं, कैमरा बंद नहीं कर सकते, किसी से बात नहीं कर सकते।’मानसिक दबाव और अलगाव (Isolation) पैदा करना।
4. फंड्स वेरिफिकेशन के नाम पर लूट‘वेरिफिकेशन’ के नाम पर सरकारी सीक्रेट खाते का झांसा देकर अपने खातों में सारा पैसा ट्रांसफर करवा लेते हैं।बैंक खाता पूरी तरह खाली हो जाता है।

⚖️ 2. क्या कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई चीज है?

भारतीय कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का कोई प्रावधान नहीं है: गृह मंत्रालय और कानूनी विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि भारत की कोई भी जांच एजेंसी (चाहे वह CBI, ED, Police या NCB हो) कभी भी वीडियो कॉल (Skype, WhatsApp या Zoom) पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती और न ही किसी भी नागरिक से पैसे ट्रांसफर करने को कहती है।

🛡️ 3. गृह मंत्रालय और RBI के 5 सख्त सुरक्षा नियम

  1. तुरंत कॉल काटें: यदि कोई खुद को पुलिस या CBI बताकर वीडियो कॉल पर पूछताछ या पैसे की मांग करे, तो बिना डरे कॉल डिस्कनेक्ट करें।
  2. कैमरा ऑन न रखें: किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्काइप या व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर अपनी स्क्रीन शेयर या वेबकैम ऑन न करें।
  3. सरकारी खाते का झांसा: सरकार या जांच एजेंसियां कभी भी सत्यापन के लिए किसी ‘सीक्रेट एस्क्रो अकाउंट’ में पैसे जमा करने को नहीं कहती हैं।
  4. नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क: किसी भी कानूनी नोटिस या धमकी के मामले में तुरंत अपने स्थानीय पुलिस स्टेशन में व्यक्तिगत रूप से जाकर पुष्टि करें।
  5. साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करें: यदि गलती से पैसे ट्रांसफर हो जाएं, तो पहले 2 से 3 घंटों के भीतर 1930 पर कॉल करें ताकि बैंक ट्रांजैक्शन को तुरंत ब्लॉक (Freeze) किया जा सके।

Paisa Khabar गोल्डन रूल: डर और जल्दबाजी ही साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार है। जब भी कोई एजेंसी के नाम पर डराए, शांत रहें, कॉल काटें और अपने परिवार व 1930 हेल्पलाइन को सूचित करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: अगर मेरे साथ डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड हो जाए तो सबसे पहले क्या करूँ?
उत्तर: बिना एक मिनट गंवाए राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर लिखित शिकायत दर्ज करें।

Q2: क्या पुलिस वीडियो कॉल पर अरेस्ट वारंट दिखा सकती है?
उत्तर: नहीं, पुलिस या कोर्ट द्वारा वारंट हमेशा भौतिक रूप से (In-person) कानून के अनुसार तामील किया जाता है। वीडियो कॉल पर दिखाया जाने वाला कोई भी वारंट 100% फर्जी होता है।

Q3: क्या ठगे गए पैसे वापस मिल सकते हैं?
उत्तर: यदि घटना के शुरुआती 1-2 घंटे के अंदर 1930 पर कॉल किया जाए, तो नोडल अधिकारी बैंक में पैसे को फ्रीज करवा देते हैं, जिससे रिफंड की संभावना बहुत अधिक होती है।

डिस्क्लेमर: यह लेख जनहित और साइबर जागरूकता के लिए प्रकाशित किया गया है। किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश के मामले में हमेशा आधिकारिक राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाने से संपर्क करें।

By Deepak Singh

Founder and Financial Content Writer at PaisaKhabar.in. Covering Banking, Loans, Government Schemes, and Personal Finance in simple Hindi.

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