नई दिल्ली (PaisaKhabar News Desk): यूपीआई और डिजिटल लेनदेन के माध्यम से बड़ी रकम प्राप्त करने या भेजने को लेकर टैक्सपेयर्स के बीच बनी असमंजस की स्थिति पर टैक्स एक्सपर्ट्स ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। Income Tax Department केवल यूपीआई (UPI), एनईएफटी (NEFT) या आरटीजीएस (RTGS) के जरिए लेनदेन करने मात्र से किसी व्यक्ति को टैक्स नोटिस जारी नहीं करता है। कर विशेषज्ञों के अनुसार, आयकर नोटिस का आधार भुगतान का डिजिटल माध्यम नहीं, बल्कि पैसों का वास्तविक स्रोत और करदाताओं द्वारा आईटीआर फाइलिंग सत्र में की गई आय की घोषणा होती है।
📌 मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- सिर्फ यूपीआई (UPI) या एनईएफटी से पैसे लेने या भेजने पर इनकम टैक्स नोटिस जारी नहीं होता है।
- Statement of Financial Transactions (SFT) के जरिए बैंक बड़े डिजिटल लेनदेनों की जानकारी आयकर विभाग को भेजते हैं।
- सब्जी वाले को 20 रुपये के ऑनलाइन भुगतान जैसे छोटे लेनदेन पूरी तरह सामान्य डिजिटल प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
- अपने ही बैंक खातों के बीच पैसे ट्रांसफर करना या परिवार से खर्च की भरपाई लेना कर योग्य आय में नहीं आता है।
यूपीआई लेनदेनों पर Income Tax विभाग की निगरानी और वास्तविक नियम
डिजिटल पेमेंट के तेजी से बढ़ते दायरे के बीच यह भ्रम फैला हुआ है कि यूपीआई से बड़ी रकम प्राप्त करने पर सीधे टैक्स नोटिस आ जाता है। ClearTax और SK Patodia & Associates LLP के टैक्स एक्सपर्ट्स ने स्पष्ट किया है कि Income Tax Department केवल यूपीआई, एनईएफटी या आरटीजीएस के माध्यम से रकम प्राप्त करने के आधार पर नोटिस नहीं भेजता। आयकर विभाग यह जांच करता है कि संबंधित राशि आपकी घोषित आय से मेल खाती है या नहीं। यदि लेनदेन का स्रोत पूरी तरह वैध और स्पष्ट है, तो डिजिटल माध्यम से कोई परेशानी नहीं होती।
अक्सर लोग दैनिक जीवन में 20 रुपये जैसे छोटे यूपीआई भुगतान से लेकर व्यावसायिक प्राप्तियों तक डिजिटल लेनदेन का उपयोग करते हैं। Income Tax Department का मुख्य उद्देश्य केवल उन लेनदेनों की पहचान करना है जो अघोषित आय की श्रेणी में आते हैं। यदि कोई करदाता व्यापारिक बिक्री, वेतन या कानूनी देनदारी के तहत यूपीआई से रकम लेता है और उसे अपने बही-खातों में सही ढंग से दर्ज करता है, तो विभाग द्वारा कोई प्रतिकूल कार्रवाई या पूछताछ नहीं की जाती है।
स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन (SFT) और प्रोजेक्ट इनसाइट की भूमिका
आयकर विभाग करदाताओं की उच्च मूल्य वाली वित्तीय गतिविधियों पर नजर रखने के लिए Statement of Financial Transactions (SFT) प्रणाली का उपयोग करता है। CBDT के नियमों के तहत बैंक और वित्तीय संस्थान कुछ खास निर्धारित सीमाओं से अधिक के लेनदेनों की जानकारी सीधे विभाग को देते हैं। Income Tax Department अपने उन्नत 'Project Insight' और एआई-संचालित डेटा विश्लेषण के जरिए इन SFT रिपोर्टों का मिलान करदाता द्वारा दाखिल ITR से करता है। यदि SFT डेटा और रिटर्न में अंतर मिलता है, तभी स्पष्टीकरण मांगा जाता है।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि यूपीआई से रकम प्राप्त करने के लिए ऐसी कोई सार्वभौमिक सीमा तय नहीं है, जिसे पार करते ही हर नागरिक को नोटिस जारी कर दिया जाए। उदाहरण के लिए, अपने ही दो बैंक खातों के बीच फंड ट्रांसफर करना, परिवार के सदस्यों से घरेलू खर्च की भरपाई प्राप्त करना, या उचित दस्तावेजों के साथ बैंक या रिश्तेदारों से कर्ज लेना कर योग्य आय की परिभाषा में नहीं आता। ऐसे लेनदेनों पर आयकर की कोई देनदारी नहीं बनती है।
व्यवसायिक प्राप्तियां और आईटीआर दाखिल करने की वैधानिक आवश्यकताएं
जो व्यापारी या पेशेवर अपनी सेवाओं अथवा बिक्री के लिए यूपीआई से बार-बार भुगतान प्राप्त करते हैं, उनके लिए यह अनिवार्य है कि वे इन प्राप्तियों को अपनी कुल आय में शामिल करें। आईटीआर फाइलिंग सत्र 2026-27 के दौरान यदि किसी व्यक्ति की डिजिटल व्यावसायिक प्राप्तियां उसकी घोषित कर योग्य आय से मेल नहीं खाती हैं, तो आयकर विभाग धारा 142(1) या 143(2) के तहत नोटिस जारी कर सकता है। इसलिए सभी डिजिटल प्राप्तियों का पारदर्शी रिकॉर्ड रखना अत्यंत आवश्यक है।
कर विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि किसी करदाता को यूपीआई लेनदेनों के संबंध में आयकर नोटिस प्राप्त होता है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। यदि आपके पास बैंक स्टेटमेंट, इनवॉइस, या लेन-देन की रसीद जैसे वैध दस्तावेज मौजूद हैं, तो आप विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन अपना स्पष्टीकरण दर्ज कर सकते हैं। सही साक्ष्य प्रस्तुत करने पर नोटिस की प्रक्रिया को बिना किसी दंड या अतिरिक्त कर के समाप्त कर दिया जाता है।
डिजिटल लेनदेनों को सुरक्षित और टैक्स-अनुपालन योग्य बनाने के चरण
आयकर विभाग के किसी भी संभावित नोटिस से बचने और अपने यूपीआई लेनदेनों का पारदर्शी रिकॉर्ड बनाए रखने के लिए करदाताओं को निम्नलिखित आधिकारिक अनुपालन प्रक्रिया का पालन करना चाहिए:
- चरण 1: व्यक्तिगत और व्यापारिक उपयोग के लिए अलग-अलग बैंक खातों और यूपीआई आईडी का प्रयोग करें।
- चरण 2: सभी व्यावसायिक यूपीआई प्राप्तियों के लिए उचित इनवॉइस, बिल और बैंक स्टेटमेंट का रिकॉर्ड रखें।
- चरण 3: आईटीआर फाइलिंग सत्र 2026-27 में अपनी कुल डिजिटल प्राप्तियों की सही जानकारी दर्ज करें।
- चरण 4: आयकर नोटिस मिलने पर 30 दिन के भीतर ई-फाइलिंग पोर्टल पर साक्ष्यों के साथ जवाब दें।