नई दिल्ली (PaisaKhabar News Desk): शेयर बाजार के पिछले कारोबारी सत्र 23 अक्टूबर 2026 को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 537.76 अंकों यानी 0.73 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,711.63 के स्तर पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 इंडेक्स 199.95 अंकों या 0.88 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,487.70 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई बैंक निफ्टी में भी 615.90 अंकों यानी 1.12 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई और यह 54,309.80 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, ग्लोबल बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और बिकवाली के भारी दबाव के कारण घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स लगातार दबाव में नजर आ रहे हैं। इस माहौल में निवेशकों को टेक्निकल लेवल्स और सपोर्ट जोन्स पर पैनी नजर रखते हुए बेहद सतर्कता के साथ अपनी ट्रेडिंग रणनीति तैयार करने की सलाह दी जा रही है।
📌 मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- सेंसेक्स 23 अक्टूबर के सत्र में 537.76 अंक फिसलकर 72,711.63 पर बंद हुआ।
- निफ्टी 50 इंडेक्स 199.95 अंक गिरकर 22,487.70 के महत्वपूर्ण स्तर पर आया।
- बैंक निफ्टी में 615.90 अंकों की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जो 54,309.80 पर बंद हुआ।
- विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने पिछले सत्र में ₹3,458.70 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की।
सेंसेक्स और निफ्टी में भारी बिकवाली का तकनीकी विश्लेषण
शेयर बाजार में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान चौतरफा बिकवाली देखने को मिली, जिसके परिणामस्वरूप प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स 73,665.64 के स्तर पर खुलकर दिन के ऊपरी स्तर 73,766.51 तक गया, लेकिन ऊपरी स्तरों पर टिक न पाने के कारण अंत में 72,487.70 के निचले स्तर को छूते हुए 72,711.63 पर बंद हुआ। इसी प्रकार एनएसई निफ्टी 50 ने 22,742.20 पर शुरुआत की और दिन के दौरान 22,787.25 के उच्च स्तर को छूने के बाद फिसलकर 22,407.05 के निचले स्तर तक लुढ़क गया, और अंत में 22,487.70 पर कारोबार समाप्त किया। इस दौरान बाजार में वोलटिलिटी इंडेक्स वीआईएक्स (VIX) में उछाल देखा गया, जिससे ट्रेडर्स में अनिश्चितता का माहौल स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
बैंक निफ्टी इंडेक्स ने भी बाजार के इस नकारात्मक रुख का पूरी तरह अनुसरण किया और भारी बिकवाली के चलते 54,309.80 के स्तर पर बंद हुआ। बैंक निफ्टी का intraday मूवमेंट 54,138.80 से 54,990.50 के दायरे में रहा, जिसमें बैंकिंग शेयरों में आई सुस्ती ने मुख्य भूमिका निभाई। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रमुख बैंकिंग शेयरों में उच्च स्तर पर मुनाफावसूली और कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण यह दबाव बना है। बाजार की इस मंदी के बीच निवेशकों को किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचने और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में ही चुनिंदा खरीदारी करने के लिए कहा जा रहा है, क्योंकि बाजार का शॉर्ट-टर्म टेक्निकल सेटअप फिलहाल कमजोर नजर आ रहा है।
संस्थागत कैश फ्लो और FII-DII गतिविधियों का आंकलन
घरेलू शेयर बाजार की दिशा तय करने में संस्थागत निवेशकों की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले कारोबारी सत्र में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाजार में खरीदारी का सिलसिला जारी रखते हुए ₹16,242.83 करोड़ के शेयर खरीदे और ₹13,351.51 करोड़ के शेयर बेचे, जिससे उनका शुद्ध कैश फ्लो ₹2,891.32 करोड़ सकारात्मक रहा। इसके विपरीत, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय बाजारों से पूंजी निकासी जारी रखी और ₹13,627.54 करोड़ की खरीदारी के मुकाबले ₹17,086.24 करोड़ की बिकवाली की, जिसके परिणामस्वरूप FII का शुद्ध कैश फ्लो ₹3,458.70 करोड़ नकारात्मक दर्ज किया गया।
यह ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है कि आज (23 अक्टूबर) के कारोबारी सत्र के लिए प्रोविजनल FII और DII आंकड़े एक्सचेंज द्वारा शाम को जारी किए जाते हैं, इसलिए निवेशकों को पिछले सत्र के इन्हीं आंकड़ों को बेंचमार्क मानकर अपनी रणनीति बनानी चाहिए। विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली भारतीय बाजारों पर दबाव का एक बड़ा कारण बनी हुई है, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों का मजबूत समर्थन बाजार को बड़े पतन से बचाने में मददगार साबित हो रहा है। जानकारों का कहना है कि जब तक FII का रुख सकारात्मक नहीं होता, तब तक बाजार में सीमित दायरे में कारोबार और उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहने की पूरी संभावना है।
प्रमुख टेक्निकल लेवल्स और आगामी कारोबारी सत्र की रणनीति
आगामी कारोबारी सत्र के लिए तकनीकी विश्लेषकों ने निफ्टी और बैंक निफ्टी के महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स की पहचान कर ली है। निफ्टी 50 के लिए तत्काल सपोर्ट स्तर लगभग 22,450 पर है, जबकि ऊपरी स्तरों पर 22,900 के आसपास कड़ा रेजिस्टेंस बना हुआ है। यदि निफ्टी 22,450 के इस महत्वपूर्ण सपोर्ट को होल्ड करने में सफल रहता है, तो बाजार में एक सीमित रिकवरी देखने को मिल सकती है, अन्यथा बिकवाली का दबाव और गहरा सकता है। इसी तरह सेंसेक्स के लिए निकटतम सपोर्ट लगभग 72,600 के स्तर पर देखा जा रहा है और 74,100 का स्तर एक मजबूत रुकावट या रेजिस्टेंस के रूप में कार्य करेगा।
| प्रमुख इंडेक्स / स्टॉक | पिछला क्लोजिंग स्तर | ताज़ा स्तर व बदलाव (अंक / %) | प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स |
|---|---|---|---|
| BSE Sensex | 73,249.39 | 72,711.63 (-537.76 अंक / -0.73%) | सपोर्ट: ~72,600 | रेजिस्टेंस: ~74,100 |
| NSE Nifty 50 | 22,687.65 | 22,487.70 (-199.95 अंक / -0.88%) | सपोर्ट: ~22,450 | रेजिस्टेंस: ~22,900 |
| NSE Bank Nifty | 54,925.70 | 54,309.80 (-615.90 अंक / -1.12%) | सपोर्ट: ~54,200 | रेजिस्टेंस: ~55,350 |
बैंक निफ्टी के तकनीकी चार्ट का विश्लेषण करें तो इसके लिए तत्काल सपोर्ट 54,200 के स्तर पर है और ऊपरी स्तरों पर 55,350 का कड़ा रेजिस्टेंस मुस्तैद है। बाजार विशेषज्ञों की सलाह है कि मौजूदा वोलेटाइल माहौल में ट्रेडर्स को 'सेल ऑन राइज' यानी उछाल पर बिकवाली की रणनीति अपनानी चाहिए। निवेशकों को अपने स्टॉप-लॉस का कड़ाई से पालन करना चाहिए और अत्यधिक लिवरेज वाले फ्यूचर्स एवं ऑप्शंस ट्रेड से बचना चाहिए। स्टॉक-स्पेसिफिक एक्शन में मजबूत बैलेंस शीट और Q2 नतीजों के आधार पर ही चुनिंदा शेयरों में पोजीशन बनानी समझदारी होगी।
बाजार में जोखिम प्रबंधन और ट्रेडर्स के लिए अनुशासन
वर्तमान बाजार परिस्थितियों में पूंजी की सुरक्षा और सख्त जोखिम प्रबंधन सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। नीचे दिए गए चरणों का पालन करके निवेशक अपनी ट्रेडिंग रणनीति को सुरक्षित और प्रभावी बना सकते हैं:
1. बाजार के प्रत्येक ट्रेड में हमेशा 1% से 2% का कड़ा स्टॉप-लॉस अनिवार्य रूप से लगाएं ताकि बड़े नुकसान से बचा जा सके।
2. निफ्टी के 22,450 और बैंक निफ्टी के 54,200 के सपोर्ट लेवल्स का विशेष ध्यान रखते हुए ही नई लॉन्ग पोजीशन बनाएं।
3. ग्लोबल मार्केट्स, गिफ्ट निफ्टी और FII-DII के आंकड़ों की नियमित समीक्षा के बाद ही इंट्राडे में कोई बड़ा निर्णय लें।
4. अत्यधिक वोलटिलिटी के दौरान ओवर-ट्रेडिंग से बचें और केवल चुनिंदा मजबूत शेयरों में ही निवेश केंद्रित रखें।
- चरण 1: बाजार के प्रत्येक ट्रेड में हमेशा 1% से 2% का कड़ा स्टॉप-लॉस अनिवार्य रूप से लगाएं ताकि बड़े नुकसान से बचा जा सके।
- चरण 2: निफ्टी के 22,450 और बैंक निफ्टी के 54,200 के सपोर्ट लेवल्स का विशेष ध्यान रखते हुए ही नई लॉन्ग पोजीशन बनाएं।
- चरण 3: ग्लोबल मार्केट्स, गिफ्ट निफ्टी और FII-DII के आंकड़ों की नियमित समीक्षा के बाद ही इंट्राडे में कोई बड़ा निर्णय लें।
- चरण 4: अत्यधिक वोलटिलिटी के दौरान ओवर-ट्रेडिंग से बचें और केवल चुनिंदा मजबूत शेयरों में ही निवेश केंद्रित रखें।