नई दिल्ली (PaisaKhabar News Desk): पूंजी बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने मेनबोर्ड इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) और फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) से जुड़े मौजूदा विनियामक नियमों की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय वर्किंग ग्रुप गठित करने का निर्णय लिया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य भारतीय प्राथमिक पूंजी बाजार में फंड जुटाने की प्रक्रिया को अत्यधिक सुगम, पारदर्शी और त्वरित बनाना है। वर्तमान में कंपनियों को ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) की मंजूरी से लेकर लिस्टिंग तक कई जटिल विनियामक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। सेबी का यह विशेष कार्य समूह इश्यू साइज, न्यूनतम सार्वजनिक निर्गम, प्रमोटर योगदान और एंकर आवंटन नियमों को अधिक व्यवहार्य बनाने पर विस्तृत सिफारिशें पेश करेगा।
📌 मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- सेबी मेनबोर्ड IPO और FPO नियमों को सरल बनाने हेतु विशेषज्ञ वर्किंग ग्रुप गठित करेगा
- प्राइमरी मार्केट में DRHP की जांच और विनियामक मंजूरी की समयसीमा को घटाने पर जोर
- न्यूनतम 25% पब्लिक शेयरहोल्डिंग और प्रमोटर कंट्रीब्यूशन नियमों की व्यावहारिक समीक्षा होगी
- एंकर निवेशकों के लॉक-इन पीरियड और रिटेल निवेशकों के कोटा आवंटन मानकों पर सुझाव मिलेंगे
सेबी का प्राथमिक बाजार सुधार: मेनबोर्ड IPO प्रक्रिया होगी सुगम
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने घरेलू प्राथमिक पूंजी बाजार को वैश्विक मानकों के अनुरूप अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कमर कस ली है। नियामक ने मेनबोर्ड IPO और FPO से संबंधित विनियामक व्यवस्था की व्यापक समीक्षा के लिए एक समर्पित वर्किंग ग्रुप गठित करने का फैसला किया है। वर्तमान में सेबी (ICDR) विनियम 2018 के तहत कंपनियों को पब्लिक इश्यू लाने के लिए कई कठोर शर्तों का अनुपालन करना होता है। नए वर्किंग ग्रुप का मुख्य फोकस अनावश्यक विनियामक अड़चनों को दूर करना और ड्राफ्ट पेपर दाखिल करने से लेकर स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्टिंग तक के कुल समय चक्र को उल्लेखनीय रूप से घटाना होगा।
इस विनियामक पहल से कॉरपोरेट जगत को बाजार से इक्विटी पूंजी जुटाने में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय बाजार में रिकॉर्ड संख्या में कंपनियां लिस्ट हुई हैं, लेकिन मर्चेंट बैंकर्स और उद्योग जगत लगातार आवेदन प्रक्रिया को अधिक डिजिटल और कम बोझिल बनाने की मांग कर रहे थे। सेबी द्वारा गठित यह विशेष समूह विभिन्न हितधारकों, मर्चेंट बैंकरों, कानूनी सलाहकारों और संस्थागत निवेशकों से सीधे इनपुट लेगा। इसका उद्देश्य नियमों में स्पष्टता लाकर लिस्टिंग प्रक्रिया की लागत को कम करना और छोटे व बड़े दोनों प्रकार के निर्गमों के लिए अनुपालन को सहज बनाना है।
सेबी ICDR विनियम 2018 और वर्किंग ग्रुप की समीक्षा के मुख्य बिंदु
सेबी के इस कदम का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य देखें तो सेबी (इश्यू ऑफ कैपिटल एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स) विनियम 2018 ने 2009 के पुराने नियमों की जगह ली थी। मौजूदा विनियामक ढांचे के तहत कंपनियों को न्यूनतम 3 वर्षों का ट्रैक रिकॉर्ड, शुद्ध संपदा मानक और 20% न्यूनतम प्रमोटर योगदान बनाए रखना अनिवार्य होता है। इसके अलावा वर्तमान नियमों के अनुसार एंकर निवेशकों के 50% शेयरों के लिए 30 दिन और शेष 50% हिस्से के लिए 90 दिन का लॉक-इन पीरियड लागू रहता है। वर्किंग ग्रुप इन सभी समय सीमाओं और आवंटन शर्तों की समीक्षा करेगा ताकि बाजार में पर्याप्त लिक्विडिटी बनी रहे और अनिश्चितता कम हो।
इसके साथ ही फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) के नियमों को भी आसान बनाया जाएगा। वर्तमान व्यवस्था में पहले से लिस्टेड कंपनियों को अतिरिक्त पूंजी जुटाने के लिए भी लंबी विनियामक प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण कई कंपनियां FPO के बजाय क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) या राइट्स इश्यू का रास्ता चुनती हैं। सेबी का वर्किंग ग्रुप FPO रूट को अधिक आकर्षक बनाने के लिए डिस्क्लोजरूरतों को युक्तिसंगत बनाएगा। इससे लिस्टेड कंपनियां बाजार की अनुकूल परिस्थितियों में बहुत कम समय और कम अनुपालन लागत के साथ तेजी से अतिरिक्त पूंजी जुटाने में सक्षम होंगी।
संस्थागत और खुदरा निवेशकों के हितों का संतुलन एवं पारदर्शिता
मेनबोर्ड IPO और FPO नियमों की समीक्षा में निवेशकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। सेबी का मुख्य उद्देश्य नियमों को सरल बनाने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी है कि रिटेल और संस्थागत निवेशकों के हितों से कोई समझौता न हो। ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में वित्तीय आंकड़ों, संबंधित पक्ष लेनदेन (RPT), और निर्गम से जुटाई गई राशि के उपयोग के खुलासे को अधिक स्पष्ट और पारदर्शी बनाया जाएगा। नियामक यह सुनिश्चित करना चाहता है कि साधारण निवेशक भी जटिल वित्तीय विवरणों को सरलता से समझ सकें और बिना किसी भ्रम के सही निवेश निर्णय ले सकें।
इसके अलावा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की भागीदारी को सुव्यवस्थित करने के लिए बुक बिल्डिंग प्रक्रिया के तकनीकी पहलुओं की भी समीक्षा की जाएगी। मौजूदा नियमों में रिटेल निवेशकों के लिए 35%, गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) के लिए 15% और QIB वर्ग के लिए 50% का सामान्य आवंटन ढांचा निर्धारित है। वर्किंग ग्रुप यह आकलन करेगा कि क्या वर्तमान कोटा संरचना और एंकर बुक का आकार आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुसार सही है। इन व्यापक सुधारों से प्राथमिक बाजार में मूल्य निर्धारण अधिक कुशल और यथार्थवादी होने की पूरी संभावना है।
IPO और FPO निर्गम के लिए सेबी विनियामक अनुपालन प्रक्रिया
मेनबोर्ड पर पब्लिक इश्यू लाने की तैयारी कर रही किसी भी कंपनी और उसमें भाग लेने वाले निवेशकों को सेबी के आधिकारिक विनियामक चरणों का सावधानीपूर्वक पालन करना आवश्यक होता है।
- चरण 1: कंपनी सेबी-पंजीकृत मर्चेंट बैंकर की नियुक्ति कर सेबी पोर्टल पर DRHP दाखिल करे और सार्वजनिक टिप्पणी हेतु 21 दिनों की अवधि पूरी करे।
- चरण 2: सेबी के विनियामक टिप्पणियों और प्रश्नों का समाधान कर अंतिम RHP स्टॉक एक्सचेंजों (BSE/NSE) और रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) में दर्ज करें।
- चरण 3: एंकर निवेशकों के लिए बिडिंग विंडो लिस्टिंग से 1 दिन पूर्व खोलें और न्यूनतम 25% सार्वजनिक शेयरधारिता के नियम का पूर्ण पालन सुनिश्चित करें।
- चरण 4: खुदरा निवेशक UPI आधारित ASBA प्रक्रिया के जरिए ₹2 लाख तक की अधिकतम सीमा में IPO आवेदन करें और T+3 लिस्टिंग समयसीमा का लाभ लें।