नई दिल्ली (PaisaKhabar News Desk): डिजिटल लेनदेन के दौरान फेल्ड ट्रांजैक्शन की समस्या से जूझ रहे करोड़ों बैंक ग्राहकों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सख्त विनियामक दिशानिर्देश लागू किए हैं। केंद्रीय बैंक के 'हार्मनाइजेशन ऑफ टर्नअराउंड टाइम (TAT)' फ्रेमवर्क के तहत, यदि किसी ग्राहक के खाते से UPI, ATM या कार्ड ट्रांजैक्शन विफल होने के बावजूद राशि कट जाती है, तो बैंकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑटो-रिवर्सल पूरा करना अनिवार्य है। यदि बैंक T+1 कार्यदिवस के भीतर कटी हुई राशि वापस जमा करने में विफल रहते हैं, तो बैंक को ग्राहक को बिना किसी आवेदन के प्रति दिन ₹100 का अनिवार्य हर्जाना देना होगा।
📌 मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- RBI के अनुसार UPI फेल्ड ट्रांजैक्शन का निपटान T+1 कार्यदिवस में पूरा होना अनिवार्य है
- निर्धारित समयसीमा के बाद रिफंड में देरी पर बैंक द्वारा रोज ₹100 का मुआवजा देय है
- ATM कैश न निकलने पर T+5 दिनों के भीतर ऑटो-रिवर्सल न होने पर भी ₹100 प्रतिदिन पेनल्टी लागू
- समाधान न मिलने पर ग्राहक RBI के CMS पोर्टल पर एकीकृत लोकपाल योजना 2021 के तहत शिकायत कर सकते हैं
RBI का TAT फ्रेमवर्क और प्रतिदिन ₹100 मुआवजा नियम
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार डिजिटल भुगतान में तकनीकी खराबी के चलते विफल हुए सौदों के लिए कड़े नियम निर्धारित हैं। जब कोई ग्राहक UPI के माध्यम से मर्चेंट या व्यक्ति को भुगतान करता है और पैसा खाते से कटने के बावजूद प्राप्तकर्ता के खाते में क्रेडिट नहीं होता, तो इसे 'विफल लेनदेन' माना जाता है। रिज़र्व बैंक के नियमों के तहत ऐसे मामलों में बैंक को ट्रांजैक्शन की तारीख यानी 'T' के अगले दिन 'T+1' तक धनराशि ग्राहक के खाते में स्वतः लौटानी होती है।
यदि बैंक निर्धारित समयसीमा के भीतर यह राशि रिवर्स करने में असमर्थ रहता है, तो समयसीमा समाप्त होने के अगले दिन से ही प्रतिदिन ₹100 का हर्जाना लगना शुरू हो जाता है। यह राशि सीधे ग्राहक के बचत खाते में जमा की जाती है। इसके लिए ग्राहक को अलग से कोई दावा प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑटोमेटेड रखी गई है ताकि डिजिटल भुगतान प्रणाली पर आम उपभोक्ताओं का भरोसा मजबूत बना रहे।
UPI, ATM और कार्ड ट्रांजैक्शन के लिए निर्धारित रिवर्सल समयसीमा
आरबीआई का यह नियम केवल UPI तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्ड और ATM विड्रॉल पर भी समान रूप से लागू होता है। ATM से नकदी निकालते समय यदि मशीन से नोट नहीं निकले लेकिन खाते से डेबिट हो गया, तो बैंकों को T+5 कार्यदिवसों के भीतर इस राशि को रिवर्स करना होता है। पांच दिनों के बाद प्रत्येक अतिरिक्त दिन के विलंब पर भी ग्राहक को ₹100 प्रतिदिन के हिसाब से क्षतिपूर्ति दी जाती है।
वहीं E-Commerce मर्चेंट भुगतान या पॉइंट ऑफ सेल (PoS) स्वाइप मशीन पर कार्ड अस्वीकृत होने और खाता डेबिट होने पर ऑटो-रिवर्सल की समयसीमा T+1 दिन तय की गई है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और वाणिज्यिक बैंकों जैसे SBI, HDFC Bank, ICICI Bank और PNB को अपने सिस्टम को इन दिशानिर्देशों के अनुरूप स्वतः सुलह करने के लिए तकनीकी रूप से सक्षम बनाना अनिवार्य किया गया है।
बैंकों की तकनीकी जवाबदेही और बैंकिंग लोकपाल व्यवस्था
भुगतान प्रणाली में पारदर्शिता और उपभोक्ताओं के वित्तीय हितों की रक्षा के लिए पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट 2007 के प्रावधानों के अंतर्गत यह रूपरेखा तैयार की गई है। अक्सर्वर डाउन होने, नेटवर्क टाइमआउट या बैंक एपीआई फेलियर के कारण रिफंड फंस जाते हैं। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि तकनीकी व्यवधान का हवाला देकर बैंक अपनी देनदारी से बच नहीं सकते हैं और मुआवजा सीधे ग्राहक के मूल खाते में क्रेडिट होना चाहिए।
यदि निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी बैंक रिफंड या पेनल्टी की राशि देने में आनाकानी करता है, तो ग्राहक RBI इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन स्कीम 2021 के अंतर्गत विनियामक हस्तक्षेप की मांग कर सकते हैं। लोकपाल के समक्ष शिकायत दर्ज होने पर बैंक को न केवल मूल राशि और ₹100 दैनिक हर्जाना चुकाना पड़ सकता है, बल्कि मानसिक प्रताड़ना और सेवा में कमी के लिए अतिरिक्त हर्जाने का आदेश भी पारित हो सकता है।
फेल्ड पेमेंट रिफंड और मुआवजा पाने की चरणबद्ध प्रक्रिया
यदि आपका UPI ट्रांजैक्शन फेल हो गया है और निर्धारित समय बीतने के बाद भी पैसा वापस नहीं आया है, तो अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए विनियामक समाधान प्राप्त करने के लिए यह आधिकारिक प्रक्रिया अपनाएं:
- चरण 1: UPI ऐप में जाकर 12-अंकीय UTR नंबर नोट करें और इन-ऐप डिस्प्यूट रेजोल्यूशन के तहत शिकायत दर्ज करें
- चरण 2: T+1 दिन की मियाद पूरी होने के बाद संबंधित बैंक शाखा या नेटबैंकिंग पर लिखित शिकायत दर्ज कर शिकायत संख्या लें
- चरण 3: 30 दिनों तक समाधान या ₹100 दैनिक हर्जाना न मिलने पर cms.rbi.org.in पोर्टल पर ऑनलाइन केस दर्ज करें
- चरण 4: आरबीआई लोकपाल के समक्ष बैंक स्टेटमेंट और UTR साक्ष्य प्रस्तुत कर मूल राशि व ₹100 प्रतिदिन क्षतिपूर्ति का दावा करें