नई दिल्ली: भारत में सड़क दुर्घटनाओं के दौरान 'गोल्डन ऑवर' (Golden Hour) यानी हादसे के तुरंत बाद का समय किसी भी घायल व्यक्ति के जीवन और मृत्यु के बीच की सबसे निर्णायक कड़ी होता है। कई बार अस्पताल पहुंचने परिजनों की अनुपस्थिति या भारी-भरकम एडवांस डिपॉजिट के अभाव में इलाज शुरू होने में देरी हो जाती है। देशवासियों को इस गंभीर समस्या से राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने PM-RAHAT (Prime Minister – Road Accident Victims' Hospitalisation and Assured Treatment) योजना को आधिकारिक रूप से देश भर में प्रभावी बना दिया है। इस क्रांतिकारी योजना के तहत किसी भी सड़क हादसे के पीड़ित को अस्पताल में भर्ती होने पर अधिकतम ₹1.5 लाख (₹1,50,000) तक का पूरी तरह मुफ्त कैशलेस इलाज सुनिश्चित किया गया है।
क्या है PM-RAHAT योजना और इसका उद्देश्य?
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वाराष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल के समन्वय से तैयार की गई यह योजना मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 162 के तहत अनिवार्य प्रावधानों को जमीनी स्तर पर लागू करती है। इसका प्राथमिक उद्देश्य सड़क हादसों में घायल होने वाले नागरिकों को समय पर ट्रॉमा केयर और विशेषज्ञ डॉक्टरों की आपातकालीन सेवा उपलब्ध कराकर मृत्यु दर में भारी कमी लाना है।
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि दुर्घटना के समय पीड़ित की जेब में पैसे हैं या नहीं, उसका कोई स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) या आयुष्मान कार्ड है या नहीं—अस्पताल किसी भी हालत में मरीज का इलाज करने से इनकार नहीं कर सकता और न ही किसी अग्रिम भुगतान की मांग कर सकता है।
⚡ PM-RAHAT योजना के 4 सबसे अहम नियम
- ₹1,50,000 की वित्तीय सीमा: प्रति पीड़ित अधिकतम ₹1.5 लाख तक के इलाज का खर्च सीधे सरकार और फंड वहन करेंगे।
- 7 दिनों की उपचार अवधि: यह कैशलेस सुविधा हादसे की तारीख से अधिकतम 7 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहने पर लागू होगी।
- गोल्डन ऑवर में अनिवार्य स्टेबलाइजेशन: सामान्य चोटों के लिए 24 घंटे और गंभीर (life-threatening) मामलों में कम से कम 48 घंटे तक मरीज को बिना किसी भुगतान के इमरजेंसी स्टेबलाइजेशन दिया जाएगा।
- सार्वभौमिक सड़क कवरेज: दुर्घटना राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway), राज्य मार्ग (State Highway), एक्सप्रेसवे या शहर/गांव की किसी भी स्थानीय सड़क पर हुई हो—कवरेज समान रूप से मान्य है।
PM-RAHAT योजना: मुख्य नियम, कवरेज और पात्रता का पूरा चार्ट
| मानक (Feature) | नियम व प्रावधान (Details) | आम नागरिक के लिए लाभ (Citizen Impact) |
|---|---|---|
| अधिकतम वित्तीय सहायता | ₹1,50,000 प्रति पीड़ित व्यक्ति | आईसीयू, सर्जरी, दवाएं और डायग्नोस्टिक्स पूरी तरह कैशलेस |
| समय सीमा (Hospitalization Duration) | दुर्घटना की तारीख से 7 दिन | क्रिटिकल ट्रॉमा रिकवरी के लिए पर्याप्त समय |
| सड़क की श्रेणी (Road Scope) | सभी सड़कें (NH, SH, जिला व ग्रामीण सड़कें) | हादसा कहीं भी हो, योजना का लाभ मिलेगा |
| फंडिंग और क्लेम सेटलमेंट | मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड (MVAF) / बजट | अस्पताल सीधे सरकार/बीमा कंपनियों से बिल क्लेम करेंगे |
| आपातकालीन नंबर | 112 (ERSS नेटवर्क) | तत्काल एम्बुलेंस और नजदीकी अधिकृत अस्पताल मैपिंग |
हादसे के बाद अस्पताल में कैशलेस लाभ कैसे मिलेगा? (प्रक्रिया समझें)
योजना के अंतर्गत आम नागरिक को किसी भी प्रकार के भारी फॉर्म भरने या जटिल कागजी कार्रवाई में उलझने की आवश्यकता नहीं है। यह पूरी प्रक्रिया बैकएंड पर डिजिटल तकनीक द्वारा संचालित होती है:
- तत्काल सूचना (112 Emergency): सड़क दुर्घटना होने पर कोई भी पीड़ित या राहगीर आपातकालीन नंबर 112 पर कॉल कर सकता है। पुलिस कंट्रोल रूम और ईआरएसएस (ERSS) तुरंत नजदीकी एंबुलेंस को घटना स्थल पर रवाना करते हैं।
- नजदीकी सूचीबद्ध अस्पताल में प्रवेश: मरीज को नजदीकी ट्रॉमा सेंटर या सूचीबद्ध सरकारी/निजी अस्पताल ले जाया जाता है। अस्पताल प्रशासन तुरंत 'PM-RAHAT' प्रोटोकॉल के तहत मरीज को एडमिट कर जीवनरक्षक इलाज शुरू करता है।
- eDAR और TMS 2.0 का समन्वय: पुलिस विभाग और अस्पताल इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट (eDAR) पोर्टल और नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम (TMS 2.0) पर मरीज की प्राथमिक जानकारी और हादसे का ब्योरा दर्ज करते हैं।
- बिना बिल भुगतान के डिस्चार्ज: निर्धारित पैकेज और प्रोटोकॉल के तहत अस्पताल मरीज को उपचार देता है। ₹1.5 लाख तक के इलाज का भुगतान अस्पताल को मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड (MVAF) द्वारा सीधे ऑनलाइन बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाता है।
'राह-वीर' (Good Samaritan) को मिला पूर्ण कानूनी संरक्षण
अक्सर देखा गया है कि लोग पुलिसिया पूछताछ, अदालत के चक्कर और अस्पताल के बिल भरने के डर से दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने से कतराते थे। केंद्र सरकार ने इस योजना के तहत मददगारों यानी 'गुड सेमेरिटन' को अभूतपूर्व सुरक्षा दी है:
- मददगार नागरिक से अस्पताल कोई भी शुल्क, एडवांस डिपॉजिट या पहचान पत्र जमा करने के लिए दबाव नहीं बना सकता।
- अस्पताल या पुलिस मददगार को पूछताछ के लिए जबरन नहीं रोक सकती और न ही उसे गवाह बनने के लिए बाध्य किया जा सकता है।
- सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार मददगारों को नकद प्रोत्साहन और 'राह-वीर' सम्मान भी प्रदान करती है।
विशेषज्ञ की सलाह और अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: क्या यह योजना निजी (Private) अस्पतालों में भी काम करेगी?
उत्तर: हां, केंद्र सरकार द्वारा इस योजना के अंतर्गत आयुष्मान भारत (AB-PMJAY) से संबद्ध सभी निजी व सरकारी अस्पतालों तथा चिन्हित ट्रॉमा केयर सेंटरों को शामिल किया गया है। आपातकालीन स्थिति में कोई भी अस्पताल मरीज को प्राथमिक उपचार देने से मना नहीं कर सकता।
प्रश्न 2: यदि दुर्घटना करने वाले वाहन का थर्ड-पार्टी बीमा नहीं है या वह 'हिट एंड रन' का मामला है?
उत्तर: यदि वाहन अज्ञात है या उसका बीमा नहीं है, तब भी पीड़ित को पूरा ₹1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। ऐसे मामलों में खर्च का वहन केंद्र सरकार के विशेष बजटीय प्रावधानों द्वारा मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड से किया जाता है।
प्रश्न 3: क्या घायल व्यक्ति के पास आधार कार्ड या कोई पहचान पत्र न होने पर इलाज रुक जाएगा?
उत्तर: बिल्कुल नहीं। सुप्रीम कोर्ट और सरकार के सख्त दिशा-निर्देशों के अनुसार, 'गोल्डन ऑवर' में जीवन रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। पहचान पत्र का सत्यापन बाद में किया जा सकता है, पहले उपचार शुरू होना अनिवार्य है।