📌 त्वरित सार (Executive Brief)
- परिवार के किसी सदस्य के आकस्मिक निधन के बाद भावनात्मक दुख के साथ-साथ उनके बैंक खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और लॉकर में जमा पूंजी को प्राप्त करना एक कठिन प्रक्रिया लग सकती है।
- RBI का सख्त दिशानिर्देश: यदि खाते में नॉमिनी (Nominee) दर्ज है, तो बैंक बिना किसी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate) के 15 दिनों के भीतर क्लेम का निपटारा करने के लिए बाध्य हैं।
केस 1: जब खाते में नॉमिनी दर्ज हो (With Nominee)
यह सबसे सरल प्रक्रिया है। नॉमिनी केवल ट्रस्टी होता है जिसे बैंक पूरी राशि सौंप देता है:
- आवश्यक दस्तावेज: खाताधारक का मूल मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate), नॉमिनी का आधार व पैन कार्ड, और मृतक की बैंक पासबुक या चेकबुक।
- बैंक ब्रांच में Deceased Claim Form (Annexure-A) भरें।
- बैंक दस्तावेजों की जांच कर 7 से 15 दिनों में चेक या एनईएफटी के माध्यम से नॉमिनी के बैंक खाते में पूरी राशि ट्रांसफर कर देता है।
केस 2: जब खाते में कोई नॉमिनी दर्ज न हो (Without Nominee)
यदि मृतक ने नॉमिनी नहीं बनाया था, तो आरबीआई ने ₹5 लाख तक के दावों के लिए प्रक्रिया आसान की है:
- कानूनी वारिस प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate): तहसील या नगर निगम द्वारा जारी कानूनी वारिस प्रमाण पत्र।
- इंडेम्निटी बॉन्ड (Indemnity Bond) व हलफनामा: सभी कानूनी वारिस यह सहमति देते हैं कि यह राशि परिवार के किसी एक सदस्य को दे दी जाए।
- यदि राशि ₹5 लाख से अधिक है और परिवार में विवाद है, तभी बैंक अदालत से उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate) मांगता है।
⚠️ एफडी प्री-क्लोजर पर पेनल्टी शून्य: आरबीआई के सर्कुलर के अनुसार, यदि खाताधारक की मृत्यु के कारण समय से पहले एफडी तोड़ी जाती है, तो बैंक परिजनों से कोई प्री-मैच्योर पेनल्टी नहीं काट सकता और जितने समय एफडी चली है, उस अवधि का पूरा ब्याज परिजनों को मिलेगा।