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फ्रॉड अलर्ट • PaisaKhabar Desk • 14 अक्टूबर 2026 | 09:57 AM IST

ऑनलाइन स्कैम: 67% पीड़ितों को नहीं मिला ₹1 भी रिफंड, ₹11,158 Cr फ्रॉड डेटा; जानें 1930 और MRM से रिकवरी प्रोसेस

ऑनलाइन स्कैम: 67% पीड़ितों को नहीं मिला ₹1 भी रिफंड, ₹11,158 Cr फ्रॉड डेटा; जानें 1930 और MRM से रिकवरी प्रोसेस

नई दिल्ली (PaisaKhabar News Desk): देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल लेन-देन के बीच वित्तीय धोखाधड़ी और ऑनलाइन स्कैम्स की भयावह तस्वीर सामने आई है। वैश्विक दूरसंचार संस्था GSMA की ताज़ा कंज्यूमर स्कैम रिपोर्ट और गृह मंत्रालय (MHA) के अधीन कार्यरत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के संयुक्त विश्लेषण में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के 67 प्रतिशत पीड़ितों को अपनी कमाई का एक भी रुपया वापस नहीं मिल पाता है। हालांकि 86% से अधिक पीड़ितों ने घटना के बाद पुलिस, बैंक या 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पैसे की त्वरित लेयरिंग और तकनीकी अड़चनों के चलते दो-तिहाई लोगों का पैसा हमेशा के लिए डूब गया।

💡 PaisaKhabar टेकअवे: ऑनलाइन फ्रॉड और रिफंड की जमीनी हकीकत

  • कुल दर्ज शिकायतें: 32.80 लाख से अधिक मामले (नेशनल साइबरक्राइम पोर्टल 1930 पर पंजीकृत)
  • फ्रीज की गई कुल राशि: ₹11,158 करोड़ से अधिक (संदिग्ध बैंक व म्यूल खातों में ब्लॉक)
  • शून्य रिफंड वाले पीड़ित: 67% नागरिकों को ₹1 भी वापस नहीं मिल सका
  • 100% पूरा रिफंड: केवल 3% पीड़ितों को ही संपूर्ण राशि वापस मिली
  • आंशिक रिफंड (25% से कम): 13% पीड़ितों के खातों में आंशिक रिकवरी हुई
  • रिफंड का नया समाधान: गृह मंत्रालय द्वारा mrm-ncrp.mha.gov.in (MRM पोर्टल) की शुरुआत

साइबर फ्रॉड में क्लेम व रिफंड रिकवरी का वास्तविक आंकड़ा

संसद में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, वर्ष 2021 से 2026 के बीच नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग प्रणाली (CFCFRMS) के जरिए ₹11,158 करोड़ से अधिक की राशि संदिग्ध खातों में फ्रीज कराई गई है। इसके बावजूद आम नागरिकों तक यह पैसा न पहुंच पाना एक बहुत बड़ी प्रशासनिक और कानूनी चुनौती रहा है।

नीचे दी गई तालिका में विभिन्न स्तरों पर पीड़ितों द्वारा किए गए दावों, रिफंड प्रतिशत और रिकवरी की वास्तविक स्थिति का विस्तृत ब्योरा दिया गया है:

रिफंड का दायरा पीड़ितों का प्रतिशत औसत रिकवरी समय मुख्य कारण व जमीनी अड़चन
0% (शून्य रिफंड) 67% पीड़ित अनसुलझा / नो रिकवरी 'गोल्डन ऑवर' के बाद सूचना, पैसा 5-10 म्यूल खातों में बंटकर एटीएम से विथड्रॉ
1% से 25% (आंशिक रिफंड) 13% पीड़ित 3 से 6 महीने अकाउंट ब्लॉक होने तक अधिकांश फंड ट्रांसफर हो चुका था, केवल बची राशि फ्रीज हुई
25% से 75% रिफंड 17% पीड़ित 1 से 3 महीने समय रहते 1930 पर कॉल, प्राथमिक बेनेफिशियरी बैंक खाते में पर्याप्त राशि ब्लॉक
100% संपूर्ण रिफंड केवल 3% पीड़ित 15 से 30 दिन धोखाधड़ी के 15-20 मिनट के भीतर शिकायत, बैंक गेटवे पर ही ट्रांजैक्शन इंटरसेप्ट

₹11,158 करोड़ फ्रीज होने के बाद भी पीड़ितों को पैसा क्यों नहीं मिलता?

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि जब सरकार और पुलिस ने ₹11,158 करोड़ की भारी राशि संदिग्ध खातों में फ्रीज कर रखी है, तो फिर पीड़ितों को यह पैसा वापस क्यों नहीं मिलता? इसके पीछे मुख्य रूप से 3 तकनीकी व कानूनी कारण हैं:

  1. म्यूल अकाउंट्स और लेयरिंग (Layering): जालसाज किसी एक पीड़ित से चुराया गया पैसा तुरंत 15 से 20 अलग-अलग 'म्यूल' (किराए के फर्जी) बैंक खातों में बांट देते हैं। जब तक पुलिस पहली लेयर के खाते को फ्रीज करती है, तब तक पैसा तीसरी या चौथी लेयर के जरिए कैश में निकाला जा चुका होता है।
  2. अदालती आदेश की अनिवार्यता (पुराना नियम): पूर्व में सीआरपीसी (CrPC) की धारा 457 के तहत बैंक केवल उसी स्थिति में फ्रीज किया गया पैसा रिलीज करते थे, जब पीड़ित स्थानीय मजिस्ट्रेट कोर्ट से औपचारिक रिलीज ऑर्डर लेकर आता था। इस अदालती प्रक्रिया में वकीलों की फीस और समय का भारी नुकसान होता था।
  3. एक से अधिक दावेदार: एक ही म्यूल खाते में कई राज्यों के पीड़ितों का पैसा जमा होता है। ऐसे में यह तय करना जटिल हो जाता है कि बचे हुए फंड में से किस पीड़ित को कितना हिस्सा दिया जाए।

Money Restoration Module (MRM): ऑनलाइन रिफंड पाने का नया 4-चरणीय प्रोसेस

पीड़ितों को कोर्ट-कचहरी के चक्करों से मुक्ति दिलाने और फ्रीज किए गए ₹11,158 करोड़ की सीधी वापसी सुनिश्चित करने के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने Money Restoration Module (MRM) लागू किया है। अब पीड़ित घर बैठे डिजिटल सत्यापन के जरिए अपना रिफंड प्राप्त कर सकते हैं:

चरण प्लेटफॉर्म / पोर्टल आवश्यक दस्तावेज व कार्रवाई समय-सीमा
चरण 1: तत्काल रिपोर्टिंग 1930 हेल्पलाइन या cybercrime.gov.in बैंक स्टेटमेंट, फ्रॉड ट्रांजैक्शन यूटीआर (UTR) नंबर, एसएमएस स्क्रीनशॉट घटना के 1 घंटे के भीतर ('गोल्डन ऑवर')
चरण 2: लीन मार्किंग CFCFRMS ऑटोमेटेड बैंकिंग नेटवर्क बैंक के नोडल अधिकारी द्वारा संदिग्ध खाते में ट्रांसफर की गई राशि पर लीन (Freeze) लगाना शिकायत के 2 से 4 घंटे में
चरण 3: ऑनलाइन आवेदन MRM पोर्टल (mrm-ncrp.mha.gov.in) 14-अंकों का NCRP एक्नॉलेजमेंट ID, आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण और ई-इंडेम्निटी बॉन्ड सबमिट करना फंड फ्रीज होने के बाद
चरण 4: डायरेक्ट रिफंड पीड़ित का मूल बैंक खाता (RTGS/NEFT) पुलिस जांच अधिकारी की डिजिटल एनओसी (NOC) के बाद बैंक द्वारा सीधे खाते में पैसा ट्रांसफर 15 से 30 कार्यदिवस

🛡️ साइबर फ्रॉड से बचने के 4 गोल्डन नियम

  • 1930 नंबर को तुरंत डायल करें: किसी भी अनधिकृत ट्रांजैक्शन के 1 घंटे के भीतर 1930 पर कॉल करने से फंड्स के फ्रीज होने की संभावना 80% तक बढ़ जाती है।
  • 'डिजिटल अरेस्ट' पूरी तरह फर्जी है: भारत में पुलिस, सीबीआई, नारकोटिक्स या सुप्रीम कोर्ट कभी भी व्हाट्सएप या स्काइप वीडियो कॉल पर जांच नहीं करते और न ही 'सुरक्षित खाते' में पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।
  • रिमोट एक्सेस ऐप कभी डाउनलोड न करें: किसी अज्ञात कॉल पर AnyDesk, TeamViewer या QuickSupport जैसे ऐप डाउनलोड करने से स्कैमर्स को आपके फोन का पूरा कंट्रोल मिल जाता है।
  • बैंक कभी फोन पर ओटीपी या पिन नहीं मांगता: किसी भी लॉटरी, रिवॉर्ड पॉइंट या बिजली बिल कनेक्शन काटने की चेतावनी वाले एसएमएस में दिए गए लिंक पर कभी क्लिक न करें।
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यह विश्लेषण PaisaKhabar Financial Research Desk द्वारा आधिकारिक सरकारी अधिसूचनाओं, RBI/SEBI/IRDAI दिशानिर्देशों और बाजार के प्रमाणित आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है। यह लेख केवल वित्तीय जागरूकता और शैक्षिक जानकारी के लिए है; किसी भी निवेश या बीमा निर्णय से पूर्व अपने SEBI-पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।

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