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Business • PaisaKhabar Desk • 18 अक्टूबर 2026 | 06:36 AM IST

New Zealand FTA: भारत ने न्यूजीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौते के तहत शुल्क कटौती की अधिसूचना जारी की

New Zealand FTA: भारत ने न्यूजीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौते के तहत शुल्क कटौती की अधिसूचना जारी की

नई दिल्ली (PaisaKhabar News Desk): भारत सरकार ने न्यूजीलैंड के साथ ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत पहली टैरिफ कटौती की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस समझौते के अंतर्गत 20 अक्टूबर से न्यूजीलैंड से आयात होने वाले प्रमुख उत्पादों पर सीमा शुल्क में बड़ी राहत प्रभावी हो गई है। इसमें शीप मीट पर 0% आयात शुल्क और कीवी फल पर रियायती 15% सीमा शुल्क लागू किया गया है। इसके साथ ही वाइन और शहद जैसे उत्पादों पर भी चरणबद्ध शुल्क रियायतें दी गई हैं। मार्च 2025 में शुरू हुई यह वार्ता दिसंबर 2025 में पूरी हुई थी, जिससे भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड में शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच का अभूतपूर्व लाभ मिलेगा।

📌 मुख्य बिंदु (Key Highlights):

  • न्यूजीलैंड FTA के तहत शीप मीट के आयात पर सीमा शुल्क घटाकर 0% किया गया।
  • ताजा कीवी फल के आयात पर सीमा शुल्क को घटाकर 15% के रियायती स्तर पर लाया गया।
  • मार्च 2025 में वार्ता शुरू होकर दिसंबर 2025 में संपन्न हुआ यह ऐतिहासिक व्यापार समझौता।
  • 20 अक्टूबर से आधिकारिक सीमा शुल्क अधिसूचना के जरिए चरणबद्ध टैरिफ रियायतें लागू।

न्यूजीलैंड FTA के तहत 20 अक्टूबर से प्रभावी शुल्क कटौती

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय और वाणिज्य विभाग ने भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के तहत आयात शुल्क कटौती की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस विनियामक कदम के साथ ही 20 अक्टूबर से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में नए टैरिफ नियम पूरी तरह लागू हो गए हैं। इस अधिसूचना के तहत न्यूजीलैंड से आने वाले शीप मीट पर आयात शुल्क को घटाकर सीधे 0% कर दिया गया है। वहीं देश के प्रीमियम फल बाजार में मांग को देखते हुए न्यूजीलैंड के उच्च गुणवत्ता वाले कीवी फल पर आयात शुल्क घटाकर 15% तय किया गया है, जिससे उपभोक्ताओं को बेहतर मूल्य पर आयातित उत्पाद उपलब्ध होंगे।

इस समझौते के तहत वाइन और प्राकृतिक शहद पर भी रणनीतिक टैरिफ रियायतें अधिसूचित की गई हैं। सरकार ने घरेलू उत्पादकों और किसानों के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए कई संवेदनशील कृषि और डेयरी श्रेणियों को सुरक्षा कवच प्रदान किया है। न्यूजीलैंड जैसे विकसित देश के साथ इतने व्यापक स्तर पर शुल्क कटौती लागू करने से दोनों देशों के बीच 100% औपचारिक व्यापार नियमों का मानकीकरण हुआ है। यह अधिसूचना भारतीय बंदरगाहों और कस्टम चौकियों पर तुरंत प्रभाव से लागू कर दी गई है, जिससे क्लीयरेंस प्रक्रिया में तेजी आएगी और व्यापारिक लागत में सीधी कमी दर्ज की जाएगी।

मार्च 2025 से दिसंबर 2025 तक का ऐतिहासिक समझौता सफर

भारत और न्यूजीलैंड के बीच इस मुक्त व्यापार समझौते की आधिकारिक वार्ता मार्च 2025 में शुरू की गई थी। दोनों देशों की व्यापार वार्ता टीमों ने रिकॉर्ड गति से कार्य करते हुए मात्र 9 महीने के भीतर दिसंबर 2025 में इस समझौते को अंतिम रूप देकर संपन्न कर दिया। यह भारत के आधुनिक व्यापार इतिहास में सबसे तेजी से संपन्न होने वाले मुक्त व्यापार समझौतों में से एक बन गया है। इस त्वरित समझौते ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ अपने आर्थिक संबंध मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

दिसंबर 2025 में वार्ता पूरी होने के बाद दोनों देशों की संसदों और विनियामक प्राधिकरणों द्वारा विधिक समीक्षा पूरी की गई। इसके बाद वाणिज्य मंत्रालय ने प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) के माध्यम से विस्तृत रूपरेखा साझा की और राजस्व विभाग ने शुल्क कटौती को अधिसूचित किया। इस समझौते में भारत के संवेदनशील क्षेत्रों जैसे तरल दूध और बुनियादी डेयरी उत्पादों की घरेलू सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया है, जबकि न्यूजीलैंड के उन्नत कृषि और बागवानी उत्पादों को नियंत्रित और चरणबद्ध रियायतें देकर घरेलू प्रसंस्करण उद्योगों के लिए कच्चे माल की उपलब्धता आसान बनाई गई है।

भारतीय निर्यातकों व सेवा क्षेत्र के लिए व्यापक बाजार पहुंच

इस द्विपक्षीय व्यापार समझौते का सबसे बड़ा रणनीतिक लाभ भारतीय निर्यातकों को मिलेगा क्योंकि न्यूजीलैंड ने अपने घरेलू बाजार में भारतीय सामानों के लिए अभूतपूर्व शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान की है। भारत के श्रम-गहन क्षेत्रों जैसे वस्त्र, परिधान, चमड़ा उत्पाद, रत्न एवं आभूषण तथा इंजीनियरिंग गुड्स को अब न्यूजीलैंड के बाजार में शून्य सीमा शुल्क का लाभ मिलेगा। इससे भारतीय विनिर्माताओं को अन्य वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में सीधा मूल्य लाभ प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त भारतीय औषधियों और आयुष उत्पादों को न्यूजीलैंड के विनियामक ढांचे में त्वरित मंजूरी और सुगम बाजार पहुंच का वैधानिक लाभ दिया गया है।

वस्तु व्यापार के साथ-साथ यह मुक्त व्यापार समझौता सेवा क्षेत्र और कुशल कार्यबल की आवाजाही के लिए ऐतिहासिक अवसर खोलता है। भारत के आईटी और आईटीईएस, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, निर्माण और वित्तीय सेवा क्षेत्र के पेशेवरों के लिए न्यूजीलैंड में काम करने के अवसर सुलभ होंगे। दोनों देशों ने पेशेवरों के लिए वीजा नियमों और शैक्षिक योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता पर भी सहमति व्यक्त की है। इससे भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियरों, चार्टर्ड अकाउंटेंट और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए नए रोजगार सृजन के रास्ते खुलेंगे और भारत के समग्र सेवा निर्यात राजस्व में ठोस वृद्धि दर्ज की जाएगी।

कस्टम पोर्टल पर रियायती टैरिफ लाभ लेने की प्रक्रिया

भारतीय आयातकों और निर्यातकों को न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के तहत अधिसूचित शून्य और रियायती टैरिफ का लाभ उठाने के लिए सीमा शुल्क नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा। आयात क्लीयरेंस के दौरान वैधानिक दस्तावेजों का सटीक प्रस्तुतिकरण अनिवार्य है ताकि बिना किसी रुकावट के रियायती दरों का लाभ मिल सके।

  • चरण 1: कस्टम्स ICEGATE पोर्टल पर बिल ऑफ एंट्री दाखिल करते समय संबंधित FTA अधिसूचना संख्या का सही चयन करें।
  • चरण 2: उत्पाद पर 0% या 15% रियायती दर पाने के लिए न्यूजीलैंड के अधिकृत निकाय से जारी रूल्स ऑफ ओरिजिन सर्टिफिकेट प्रस्तुत करें।
  • चरण 3: शीप मीट और कीवी फल के शिपमेंट के लिए FSSAI और प्लांट क्वारंटाइन आयात परमिट के वैधानिक मानकों का मिलान करें।
  • चरण 4: निर्यातकों को न्यूजीलैंड कस्टम्स में ड्यूटी-फ्री क्लीयरेंस के लिए भारतीय वाणिज्य विभाग से मूल प्रमाण पत्र (CoO) लेना होगा।
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यह विश्लेषण PaisaKhabar Financial Research Desk द्वारा आधिकारिक सरकारी अधिसूचनाओं, RBI/SEBI/IRDAI दिशानिर्देशों और बाजार के प्रमाणित आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है। यह लेख केवल वित्तीय जागरूकता और शैक्षिक जानकारी के लिए है; किसी भी निवेश या बीमा निर्णय से पूर्व अपने SEBI-पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।

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