📌 मुख्य बिंदु: विकसित भारत हाई-लेवल बैंकिंग कमेटी (Executive Summary)
- कमेटी का गठन: वित्त मंत्रालय (Department of Financial Services) ने 'विकसित भारत 2047' के विजन को ध्यान में रखते हुए देश के बैंकिंग सिस्टम की पुनर्संरचना के लिए एक उच्च स्तरीय समिति (High-Level Committee on Banking) का आधिकारिक गठन किया है।
- चेयरमैन और दिग्गज सदस्य: पूर्व मुख्य सतर्कता आयुक्त (CVC) सुरेश एन. पटेल को इस पैनल का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसमें RBI के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू, पूर्व डिप्टी गवर्नर एन. एस. विश्वनाथन और इंडियन बैंक की पूर्व एमडी पद्मजा चुंदरू को सदस्य बनाया गया है।
- 6 महीने की समय-सीमा: समिति को अगले 6 महीनों में अपनी व्यापक सिफारिशें और नीतिगत रोडमैप केंद्र सरकार को सौंपना होगा।
- वैश्विक आकार के भारतीय बैंक: वर्तमान में दुनिया के शीर्ष 50 बैंकों में केवल एक भारतीय बैंक (SBI) शामिल है। कमेटी का लक्ष्य अगले 10-20 वर्षों में 5 से 10 भारतीय बैंकों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।
- AI, साइबर सुरक्षा और कानूनी सुधार: बैंकिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के सुरक्षित उपयोग, डिजिटल गिरफ्तारी व फ्रॉड से सुरक्षा और ग्रामीण व सहकारी बैंकों (RRBs & Co-ops) के कानूनों में बुनियादी बदलाव पर जोर होगा।
भारत को 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की विकसित अर्थव्यवस्था (Viksit Bharat) बनाने के लिए केंद्र सरकार ने देश के पूरे बैंकिंग ढांचे को आधुनिक और भविष्य के अनुकूल (Future-Ready) बनाने का ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा की गई घोषणा के अनुरूप, वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) ने 'बैंकिंग फॉर विकसित भारत' (High-Level Committee on Banking for Viksit Bharat) उच्च स्तरीय समिति का गठन कर दिया है। पूर्व सीवीसी सुरेश एन. पटेल के नेतृत्व वाली यह समिति भारतीय बैंकों को न केवल वैश्विक महाशक्ति बनाने का रोडमैप तैयार करेगी, बल्कि कर्ज की लागत घटाने और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने पर काम करेगी।
1. हाई-लेवल कमेटी की संरचना (Committee Members & Leadership)
इस उच्च स्तरीय पैनल में बैंकिंग, वित्तीय सतर्कता और नियामक संस्थाओं के शीर्ष दिग्गजों को शामिल किया गया है:
2. कमेटी के 6 प्रमुख कार्यक्षेत्र व जनादेश (Terms of Reference)
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस कमेटी को निम्नलिखित 6 महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विस्तृत अध्ययन करके ठोस नीतिगत सिफारिशें देने का दायित्व सौंपा गया है:
- वैश्विक आकार के भारतीय बैंक (Global Scale & Competitiveness): वर्तमान बैंकिंग प्रणाली और प्रुडेंशियल नियमों की समीक्षा करना ताकि भारतीय बैंक पूंजी, बैलेंस शीट और तकनीकी क्षमता के मामले में वॉल स्ट्रीट और चीनी बैंकों को टक्कर दे सकें।
- रेगुलेटरी व विधायी सुधार (Legislative & Regulatory Framework): कमर्शियल बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) और सहकारी बैंकों (Cooperative Banks) को नियंत्रित करने वाले दशकों पुराने कानूनों की समीक्षा और उन्हें आधुनिक अर्थव्यवस्था के अनुकूल बनाना।
- पूंजीगत आवश्यकताएं व क्रेडिट ग्रोथ (Long-Term Capital & Funding): बैंकों, डीएफआई (DFIs) और एनबीएफसी (NBFCs) की दीर्घकालिक पूंजी आवश्यकताओं का आकलन करना ताकि बुनियादी ढांचे और बड़े प्रोजेक्ट्स को बिना एनपीए संकट के पर्याप्त कर्ज मिल सके।
- पूंजी की लागत और निजी निवेश (Cost of Capital Disparities): कॉर्पोरेट और एमएसएमई (MSME) सेक्टर के लिए उधारी की ब्याज दरों और पूंजी लागत में अंतर को कम करना, जिससे देश में निजी पूंजीगत निवेश (Private Capex) को गति मिले।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा: बैंकिंग में एआई, मशीन लर्निंग और बिग डेटा के सुरक्षित उपयोग की नीति तय करना, साथ ही बढ़ते डिजिटल अरेस्ट, साइबर फ्रॉड और डेटा चोरी के खिलाफ अभेद्य सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार करना।
- प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र उधारी (PSL) व वित्तीय समावेशन: प्राथमिकता क्षेत्र उधारी (Priority Sector Lending) और लीड बैंक स्कीम (Lead Bank Scheme) की प्रभावशीलता का पुनर्मूल्यांकन करना ताकि ग्रामीण भारत और छोटे कारोबारियों तक सस्ती पूंजी बिना रुकावट पहुंचे।
3. आम नागरिक और उद्योग जगत पर क्या होगा असर?
यह कमेटी भारत के बैंकिंग परिदृश्य में 1991 के नरसिम्हम कमेटी (Narasimham Committee) सुधारों के बाद सबसे बड़ा बदलाव ला सकती है। इससे निम्नलिखित फायदे होने की उम्मीद है:
- सस्ता होम लोन और बिजनेस लोन: उधारी की ऑपरेशनल लागत घटने और बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत होने से ग्राहकों को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर कर्ज मिलेगा।
- फ्रॉड प्रूफ बैंकिंग: हालिया पीएनबी (PNB) धोखाधड़ी और डिजिटल अरेस्ट मामलों को देखते हुए समिति की सिफारिशों से बैंकों में इंटरनल विजिलेंस और ऑटोमेटेड अलर्ट सिस्टम कड़े होंगे।
- आरआरबी और को-ऑपरेटिव का कायाकल्प: ग्रामीण बैंकों को तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जाएगा ताकि दूरदराज के किसानों और ग्रामीणों को डिजिटल बैंकिंग में शहरों जैसी सुविधाएं मिलें।