नई दिल्ली (PaisaKhabar News Desk): देश के बैंकिंग सेक्टर और प्रतिष्ठित प्रतियोगी भर्ती परीक्षाओं की साख पर बट्टा लगाने वाले अंतरराज्यीय 'सॉल्वर गैंग' और परीक्षा माफिया के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों और राज्य पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त अभियान चलाया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर के 35 से अधिक संवेदनशील ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर ऑनलाइन बैंक भर्ती परीक्षाओं को रिमोट एक्सेस टूल्स के जरिए हैक करने वाले संगठित सिंडिकेट का पर्दाफाश किया गया है। इस देशव्यापी कार्रवाई में परीक्षा केंद्रों के ऑपरेटरों, कोचिंग संचालकों और तकनीकी दलालों सहित 35 से अधिक मास्टरमाइंडों को हिरासत में लिया गया है।
📌 मुख्य बिंदु: बैंक परीक्षा फर्जीवाड़ा रेड्स (Key Investigative Highlights):
- 6 राज्यों में संयुक्त कार्रवाई: उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली के 35 परीक्षा केंद्रों व कोचिंग संस्थानों पर एक साथ रेड।
- हाई-टेक मॉडस ऑपरेंडी: एनीडेस्क (AnyDesk) और अल्ट्राव्यूअर (UltraViewer) जैसे रिमोट स्क्रीन-शेयरिंग टूल्स से परीक्षा केंद्र के बाहर बैठे सॉल्वर हल कर रहे थे पेपर।
- भारी वित्तीय जब्ती: छापेमारी के दौरान ₹6.45 करोड़ नकद, 180 से अधिक स्मार्ट डिवाइस, 42 फर्जी आधार कार्ड और सैकड़ों उम्मीदवारों के ब्लैंक चेक जब्त।
- ₹10 से ₹15 लाख प्रति सीट का रेट: क्लर्क और प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) के पदों के लिए सिंडिकेट वसूल रहा था मोटी रकम।
- नए कानून के तहत FIR: लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 (Public Examinations Act) के तहत 10 साल तक की जेल और ₹1 करोड़ जुर्माने की कार्रवाई शुरू।
रिमोट एक्सेस और डमी सॉल्वर: सिंडिकेट की खतरनाक 'हाई-टेक' मॉडस ऑपरेंडी
जांच एजेंसियों द्वारा जुटाए गए डिजिटल फॉरेंसिक सबूतों से खुलासा हुआ है कि यह गिरोह परंपरागत नकल या पर्ची के बजाय अत्याधुनिक साइबर टूल्स का इस्तेमाल कर रहा था। जांच अधिकारियों के अनुसार, सिंडिकेट ने टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्थित प्राइवेट कंप्यूटर लैब्स और परीक्षा केंद्रों के संचालकों के साथ सांठगांठ कर रखी थी। परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले, कंप्यूटर सिस्टम में बैकडोर एक्सेस और प्रॉक्सी सर्वर सक्रिय कर दिए जाते थे।
परीक्षा कक्ष में बैठा उम्मीदवार केवल माउस को स्क्रीन पर हिलाने का नाटक करता था, जबकि प्रश्नों को 400 से 500 किलोमीटर दूर किसी होटल या फ्लैट में बैठे विषय विशेषज्ञ (सॉल्वर) हल करते थे। इतना ही नहीं, बायोमेट्रिक सुरक्षा को धता बताने के लिए सिलिकॉन फिंगरप्रिंट और डमी फोटो का सहारा लिया जा रहा था। इस डिजिटल सेंधमारी से न केवल योग्य और दिन-रात मेहनत करने वाले ग्रामीण व मध्यमवर्गीय अभ्यर्थियों का हक मारा जा रहा था, बल्कि बैंकों की संवेदनशील परिचालन व्यवस्था में अयोग्य व्यक्तियों के प्रवेश का भारी जोखिम पैदा हो गया था।
6 राज्यों में हुई छापेमारी और बरामदगी का विस्तृत ब्योरा (State-Wise Action Report)
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), राज्य एसटीएफ और साइबर क्राइम विंग द्वारा 48 घंटे तक चले इस 'ऑपरेशन चक्रव्यूह' में विभिन्न राज्यों से जब्त संपत्तियों और गिरफ्तारियों का आधिकारिक विवरण नीचे दिया गया है:
| राज्य / रीजन | रेड वाले प्रमुख शहर | जब्त नकदी व संपत्ति | जब्त डिजिटल उपकरण | गिरफ्तारियां / हिरासत |
|---|---|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश | लखनऊ, प्रयागराज, मेरठ, नोएडा | ₹2.80 करोड़ नकद, 3 लग्जरी कारें | 54 लैपटॉप, 8 सर्वर, 62 मोबाइल | 14 आरोपी |
| बिहार | पटना, गया, मुजफ्फरपुर | ₹1.65 करोड़ नकद, फर्जी स्टाम्प | 38 हार्ड ड्राइव्स, 32 बायोमेट्रिक स्कैनर | 9 आरोपी |
| राजस्थान | जयपुर, जोधपुर, कोटा | ₹95 लाख नकद, 85 ब्लैंक चेकबुक्स | 26 सिस्टम, 15 डोंगल, माइक्रो ईयरपीस | 6 आरोपी |
| मध्य प्रदेश व हरियाणा | भोपाल, इंदौर, रोहतक, गुरुग्राम | ₹1.05 करोड़ नकद, बेनामी दस्तावेज | 44 फोन, 12 टैबलेट, सर्वर एक्सेस लॉग्स | 8 आरोपी |
हवाला लेन-देन और ₹50 करोड़ का मनी ट्रेल: ED की जांच का दायरा
इस पूरे घोटाले की तहकीकात में वित्तीय लेन-देन (Financial Trail) सबसे चौंकाने वाला पहलू बनकर सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के प्रारंभिक इनपुट्स के अनुसार, यह गिरोह पिछले दो वर्षों में करीब 400 से अधिक उम्मीदवारों से ₹50 करोड़ से अधिक की काली कमाई जुटा चुका है। उम्मीदवारों को फांसने के लिए गिरोह के एजेंट कोचिंग हबों (जैसे मुखर्जी नगर, प्रयागराज और पटना) में सक्रिय रहते थे।
सौदा तय होने पर अभ्यर्थी से ₹2 से ₹3 लाख एडवांस कैश लिया जाता था और शेष राशि (₹10 से ₹12 लाख) के एवज में उसके मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र (Original Marksheets) और हस्ताक्षरित ब्लैंक चेक बंधक रख लिए जाते थे। रिजल्ट आने और चयन सूची में नाम आने के बाद इस पैसे को हवाला चैनलों, फर्जी करंट अकाउंट्स और शेल कंपनियों के जरिए रियल एस्टेट व बुलियन (सोने-चांदी) में खपाया जाता था। आयकर विभाग ने अब गिरोह से जुड़े 50 से अधिक संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है।
कानून का शिकंजा: नए एंटी-पेपर लीक कानून में क्या हैं सख्त सजा के नियम?
केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में अधिसूचित किए गए लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 (Public Examinations Act) के तहत यह अब तक की सबसे बड़ी समन्वित कानूनी कार्रवाई मानी जा रही है। इस कानून के तहत परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ निम्नलिखित गैर-जमानती धाराएं लागू की गई हैं:
- संगठित परीक्षा अपराध: संगठित अपराध सिंडिकेट में शामिल आरोपियों को न्यूनतम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक का कठोर कारावास।
- ₹1 करोड़ का भारी जुर्माना: दोषी पाए जाने वाले संस्थानों और सिंडिकेट सदस्यों पर ₹1 करोड़ तक का भारी-भरकम आर्थिक दंड।
- परीक्षा केंद्रों की संपत्ति जब्ती: धांधली में शामिल निजी परीक्षा केंद्रों को हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और उनकी परिसंपत्तियों को कुर्क (Attach) किया जाएगा।
- परीक्षा खर्च की वसूली: यदि किसी परीक्षा को रद्द करना पड़ता है, तो पूरी परीक्षा प्रक्रिया का वित्तीय हर्जाना भी इन्हीं दोषियों से वसूला जाएगा।
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🛡️ उम्मीदवारों और अभिभावकों के लिए सुरक्षा चेकलिस्ट:
- शॉर्टकट या फर्जी गारंटी से बचें: कोई भी कोचिंग संस्थान या व्यक्ति पैसे के बल पर बैंक (IBPS, SBI, RBI) में चयन नहीं करा सकता। ऐसे किसी भी दावे को तुरंत फर्जी समझें।
- मूल दस्तावेज कभी न सौंपें: किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति या एजेंट को अपने मूल प्रमाण पत्र, आधार कार्ड या ब्लैंक चेक किसी भी परिस्थिति में न दें।
- आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करें: एडमिट कार्ड, आवेदन या रिजल्ट के लिए केवल अधिकृत पोर्टल्स (जैसे
ibps.inयाsbi.co.in/careers) पर ही लॉगिन करें। - साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत शिकायत करें: यदि आपसे कोई नौकरी के नाम पर पैसे मांगता है, तो बिना डरे राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (cybercrime.gov.in) या 1930 पर रिपोर्ट करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs):
Q1: क्या इस छापेमारी के बाद हालिया बैंक भर्ती परीक्षाएं रद्द हो जाएंगी?
उत्तर: जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि केवल चिन्हित दागी केंद्रों और संदिग्ध नोड्स के डेटा का फॉरेंसिक ऑडिट हो रहा है। पूरी परीक्षा रद्द करने के बजाय केवल फर्जीवाड़े में शामिल डमी उम्मीदवारों की उम्मीदवारी निरस्त कर उन पर आजीवन प्रतिबंध लगाया जाएगा।
Q2: यदि कोई अभ्यर्थी गिरोह को पैसे देकर परीक्षा में बैठ चुका है, तो उस पर क्या कार्रवाई होगी?
उत्तर: नए एंटी-पेपर लीक कानून के तहत पैसे देकर फर्जी तरीके से परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों को भी सह-आरोपी माना जाएगा। उन पर आपराधिक मुकदमा दर्ज होगा और भविष्य की सभी सरकारी परीक्षाओं से ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
Q3: भविष्य में ऐसी धांधली रोकने के लिए रिक्रूटमेंट बोर्ड क्या कदम उठा रहे हैं?
उत्तर: IBPS और बैंक रिक्रूटमेंट एजेंसियां अब AI-आधारित रियल-टाइम फेस रिकॉग्निशन, 360-डिग्री लाइव वेबकास्टिंग, और प्राइवेट लैब्स के स्थान पर केवल सरकारी शिक्षण संस्थानों व TCS iON ऑथराइज्ड नोड्स पर ही परीक्षा कराने का नया सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर रही हैं।